Tuesday, June 30, 2015

वो लड़की याद आती है ..

वो लड़की याद आती है [x3]

वो जो ख्वाबोंं मेंं बसती थी
मेरे दिल में उतरती थी

वो जो मेरी हंसी मेंं अपनी मुस्कुराहट घोल देती थी
जो मैंं दिल मेंं रखता था ज़ुबाँ से बोल देती थी

वो जो मुझको हंसाती थी की उसको अ‍च्छा लगता था
मेरा दिल खोल के हंसना
मैं जब बातें बनाता था उसे भी अच्छा लगता था
मेरे ख्वाबों में आ बसना

उसे मैं अच्छा लगता था हर ऐक अपनी बुराई में
न जाने क्यों
उसे मुझसा नहीं मिलता था इस सारी खुदाई में
ना जाने क्यों

मगर वो याद आती है
अकेला जब भी होता हूँ
कभी बारिश कि बूंदो में
कभी गर्मी की धूपो में
कभी बेरंग फूलो में
कभी सावन के झूलो में
कभी भीगे तरानो में
कभी गुज़रे ज़मानो में
कभी दिल के मकानो में

वो लड़की याद आती

बहुत दिन हो गये लेकिन अभी भी याद है मुझको
वो चेहरा सुबह की सी धूप जैसा खूबसूरत था
उसे कितना सजाती थी हया के रंग से अपनी
जो मुझसे मिलना होता था

वो हाल-ए-दिल बताती थी
सब अपने ख्वाब लाती थी
बड़े अरमान से कुछ फूल
चुन कर साथ लाती थी
मगर जब जाना होता था
तो बस दो चार आंसू से
मेरे दिल को भिगाती थी
बड़ी मुश्किल से जाती थी

जहाँ तक भी नज़र आऊँ
जहाँ तक जा सके नज़रें
वो रुक रुक कर के मुड़ती थी
नज़र इक डालने मुझपे

जो मेरे गम में अक्सर साथ मेरे खेलने को
सब आंसू ले के अपने मेंरे दिल के घर में आती थी
मैं जब थक कर के सो जाता था सब हलात से अपने
बहार-ए-सुबह सी खुश्बू से अपनी वो जगाती थी

फिर इक दिन यूँ हुआ रस्म ए ज़माना रंग ले आई
हमारे दिल भी टूटे हिज्र भी आया जुदाई भी
न कुछ फरियाद ना अश्को से क़िस्मत को बदल पाया
बगावत कि ज़माने से मगर कुछ हाथ ना आया

मुझे मालूम है अब भी वो मुझको याद करती है
कभी उसकी दुआओं ने मुझे तन्हा नहीं छोड़ा
हज़ारों बार उसके दिल को तोड़ा है ज़माने ने
मगर इक लम्हे को भी मुझसे दिल अपना नहीं मोड़ा

जो मेरे साथ चलती थी
जो मेरे साथ हंसती थी
जो मेरे साथ रोती थी
जो मुझपे जान खोती थी

ना जाने अब कहा है वो?
क्या अब भी रो रही होगी?
मेरी राह देखती होगी?
कभी मुझसे मिलेगी भी?

सुनो गर मिल कही जाये
तो कहना याद करता है
तुम्हें पागल सा एक लड़का
कभी गलियों में फिरता है
कभी वीरानियों में तुमको है वो
ढूंढ़ता रहता

उसे बरसात की रिमझिम भी अब अच्छी नहीं लगती
कोई वादा कोई भी बात अब सच्ची नहीं लगती

मगर कोई कभी आकर अगर कुछ बात करता है
की उसकी खमोशी टूटे
बहुत धीमी सी इक अवाज़ में बस इतना कहता है
कोई जो हाल-ए-दिल पूछे
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