Wednesday, June 01, 2016

Chahat Shayari mix collection चाहत पर शायरी संग्रह

“” उनकी चाहत में हम कुछ यूँ बँधे है….
वो साथ भी नही और हम अकेले भी नही…!!
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कैसी गहराई है तेरी चाहत में , मेरी मोहब्बत में ? न डूबा हूँ अब तक न सतह की कोई उम्मीद नज़र आती है ।
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मज़ा आ जाए, गर हो जाए इतना, अबकी बारिश में…
हमारी चाहत के आँसू, तुम्हारी छत पे जा बरसें
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ढूढने चला था एक शक्श की चाहत
खुद को भी खो दिया उसकी मोहब्बत मे
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हमारे बाद नहीं आएगा तुम्हें चाहत का ऐसा मज़ा ‘फ़राज़’
तुम लोगों से कहते फ़िरोगे मुझे चाहो उस की तरह
*** Chahat Shayari
तेरी चाहत मे हम जमाना भूल गये, किसी और को हम अपनाना भूल गये, तूम से मोहब्बत हे साारे जहान को बताया, बस एक तूझे ही बताना भूल गये….”
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चिरागों से अगर अँधेरा दूर होता तो चांदनी की चाहत क्यूँ होती कट सकती अगर ये ज़िन्दगी अकेले, तो साथी की जरूरत ही क्यूँ होती
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वादे वफ़ा के और चाहत जिस्म की. अगर ये मोहब्बत है तो फिर हवस किसे कहते है..!
*** Chahat Shayari
हर कोई पाने की ज़िद में हैं, शायद मुझे कोई आज़माने की ज़िद में है। जिसकी चाहत है मुझे बेइंतेहा वो मुझे भूल जाने की ज़िद में है।
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किसी की चाहत मे इतने पागल ना हो, हो सकता हे वो तुम्हारी मंज़िल ना हो, उसकी मुस्कुराहट को मोहब्बत ना समझो, कहीं ये मुस्कुराना उसकी आदत ना हो
तेरी चाहत तो मुक़द्दर है, मिले न मिले;
राहत ज़रूर मिल जाती है, तुझे अपना सोच कर
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अगर दुनिया में जीने की चाहत ना होती; तो खुदा ने मोहब्बत बनाई ना होती; लोग मरने की आरज़ू ना करते; अगर मोहब्बत में बेवाफ़ाई ना होती!
*** Chahat Shayari
मैं कुछ लिखू और तेरा ज़िक्र न हो,
वो तो मेरी चाहत की तौहीन होगी |
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अनजाने में तुझसे मुलाकात सी हो गयी दोस्ती करने चले थे और तुझसे चाहत सी हो गयी अपने वजूद में तुझे तलाश करते है, हमे तुमसे मोहब्बत सी हो गयी
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अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा
तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते
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तेरे गम को अपनी रूह में उतार लूँ.. जिन्दगी तेरी चाहत में सवार लूँ..
मुलाकात हो तुझ से कुछ इस तरह.. तमाम उमर बस इक मुलाकात में गुजार लूँ
*** Chahat Shayari
अल्फ़ाज़ो के समंदर में आप ऐसे डूबे फिर निकलने की चाहत न रही,आप याद करने लगे फ़ुर्सत के लमहों को जैसे खवाईशो की चाहत न रही…
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उतर के देख मेरी चाहत की गहराई मै
सोचना मेरे बारे मै रात की तन्हाई मै
अगर हो जाए मेरी चाहत का एहसास तो
मिलेगा मेरा अक्स तुम्हे अपनी ही परछाई मै
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बहुत गुमनाम से है चाहत के रास्ते
तू भी लापता…मैं भी लापता
*** Chahat Shayari
सीख जाअो वक्त पर किसी की चाहत की कदर करना कहीं कोई थक ना जाये, तुम्हें एहसास दिलातें दिलाते……
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मेरे दिल मे तेरी चाहत,बस जाए बन के धड़कन पल भर ना भूल पाऊ,ऐसी तड़प जगा दे।
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प्यार है मुझसे तो सारी खुशियाँ समेट लो मेरी, गमों का क्या है,ये चाहत से खुशियों में बदल जायेंगे”
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इंसान की चाहत कि उङने को पर मिले,
और परिंदे सोचते है कि रहने को घर मिले…
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रिहा कर ख़ूबसूरत दिखने की चाहत से मुझे
ऐ आईने तू मेरी सादगी को ज़मानत दे दे
*** Chahat Shayari
तुमसे इश्क की चाहत में सब कुछ सहे जा रहे है
मोहब्बत के अल्फ़ाज समंदर में बहे जा रहे है
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मेरी चाहत का एहसास भी ना होगा उसे,
उसकी हर अदा पसन्द आई बेवफाई के सिवा..
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हमने तो एक ही शख्स पर चाहत ख़त्म कर दी
अब मोहब्बत किसको कहते है मालुम नही
*** Chahat Shayari
नशा किस चीज को कहते
अगर तुम देखना चाहो,
तो जाकर के कहो उनसे,झुकी पलकें उठा लें वो..!!
अगर चाहत है उल्फत की
बसाना है उन्हें दिल में,
मिलाकरके नज़र कहदो,तुम्हें अपना बना लें वो..!!
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“दिल की धड़कन और मेरी सदा हो तुम ..
मेरी पहली और आखिरी वफ़ा हो तुम
…. मेने चाहा है तुम्हे चाहत से बढ़कर क्युकी
मेरी चाहत और चाहत की इन्तेहाँ हो तुम”…
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अभी नादाँ हु इश्क में, जताऊ कैसे,
प्यार कितना है, तुमसे बताऊ कैसे,
बहुत चाहत है, दिल में तुम्हारे लिये,
तुम ही कहो, तुम्हें अपना बनाऊ कैसे,
*** Chahat Shayari
कुछ तो है कहीं, ये जो थोड़ा प्यार-सा है
नशा है तेरा, चाहत या इक ख़ुमार-सा है…
मिला करती है मचलकर रोज ही तू मुझसे
रहता बेवक़्त फिर भी तेरा इंतज़ार-सा है..
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तुम्हारी पसंद हमारी चाहत बन जाये
तुम्हारी मुस्कुराहट दिल कि राहत बन ज़ाये !
खुदा खुशियो से इतना खुश कर दे आपको
कि आपको खुश देख़ना हमारी आदत बन जाये !
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एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यों है;
इंकार करने पर चाहत का इकरार क्यों है;
उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद;
फिर हर मोड़ पे उसी का इंतज़ार क्यों है!
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कुछ उलझे सवालो से डरता हे दिल
जाने क्यों तन्हाई में बिखरता हे दिल
किसी को पाने कि अब कोई चाहत न रही
बस कुछ अपनों को खोने से डरता हे ये दिल
***
रख भी सकता था नुमाइश में सजा कर मुझको,
दर्द की तरह रखा जिसने छुपा कर मुझको.
मेरी चाहत थी पसीने की कमाई जैसी,
मुफ़लिसी में भी रखा उसने बचा कर मुझको.
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तेरे ख़त की इबारत की मैं स्याही बन गया होता
तो चाहत की डगर का मैं भी राही बन गया होता
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बिन बात के ही रूठने की आदत है;
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है;
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है
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