Saturday, June 04, 2016

Hushan Ki Tareef Shayari mix collection हुस्न की तारीफ़ पर शायरी संग्रह

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मुझको मालूम नहीं…. हुस़्न की तारीफ,
मेरी नज़रों में हसीन ‘वो’ है, जो तुम जैसा हो, ।
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अब हम समझे तेरे चेहरे पे तिल का मतलब,
हुस्न की दौलत पे दरबान बिठा रखा है
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तेरे हुस्न पर तारीफ भरी किताब लिख देता…….
काश के तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती…….
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
!!तेरे …..हुस्न की तपिश….कहीं…जला ना दे
मुझे…….!!!
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तू कर….महोब्बत मुझसे….ज़रा….आहिस्ता
आहिस्ता..!!!
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ये आईने ना दे सकेंगे तुझे तेरे हुस्न की खबर,
कभी मेरी आँखों से आकर पूछो के कितनी हसीन हों तुम…!!
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शायद तुझे खबर नहीं ए शम्मे-आरजू,
परवाने तेरे हुस्न पे कुरबान गये है….!!
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मिलावट है तेरे हुस्न में “इत्र”और “शराब”
की,…..
तभी मैं थोड़ा महका हूं;…..थोड़ा सा बहका हूं…
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तेरे हुस्न को परदे की ज़रुरत ही क्या है,,
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद…
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तेरे हुस्न का दीवाना तो हर कोई होगा
लेकिन मेरे जैसी दीवानगी हर किसी में नहीं होगी।
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
ये तेरा हुस्न औ कमबख्त अदायें तेरी
कौन ना मर जाय,अब देख कर तुम्हें.
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तेरा हुस्न बयां करना नहीं मकसद था मेरा !
ज़िद कागजों ने की थी और कलम चल पड़ी !
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तेरा हुस्न एक जवाब,मेरा इश्क एक सवाल ही सही
तेरे मिलने कि ख़ुशी नही,तुझसे दुरी का मलाल ही सही
तू न जान हाल इस दिल का,कोई बात नही
तू नही जिंदगी मे तो तेरा ख़याल ही सही
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दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
क्या तुझे कहूं तू है मरहबा.
तेरा हुस्न जैसे है मयकदा
मेरी मयकशी का सुरूर है,
तेरी हर नजर तेरी हर अदा_
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मेरी निगाह-ए-इश्क भी
कुछ कम नही,
मगर, फिर भी
तेरा हुस्न तेरा ही हुस्न है…
***
जिस मोड़ पे तू मिल गई
वहां एक नई राह खुल गई
तू नए किरण की बहार है
अब रात भी मेरी ढल गई
मेरा इश्क भी, तेरा हुस्न भी
गजलों में आके घुल गई
मेरी शायरी की किताब तू
कभी खो गई, कभी मिल गई
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
किसका चेहरा अब मैं देखूं…?
चाँद भी देखा…! फूल भी देखा…!!
बादल बिजली…! तितली जुगनूं…!!
कोई नहीं है ऐसा…! तेरा हुस्न है जैसा…!!
***
शरीके-ज़िंदगी तू है मेरी, मैं हूँ साजन तेरा
ख्यालों में तेरी ख़ुश्बू है चंदन सा बदन तेरा
अभी भी तेरा हुस्न डालता है मुझको हैरत में
मुझे दीवाना कर देता है जलवा जानेमन तेरा
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तेरी तरफ जो नजर उठी
वो तापिशे हुस्न से जल गयी
तुझे देख सकता नहीं कोई
तेरा हुस्न खुद ही नकाब हैं
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तुझे क्या कहूं तू है मरहबा. तेरा हुस्न जैसे है मयकदा
मेरी मयकशी का सुरूर है, तेरी हर नजर तेरी हर अदा
तेरे इख़्तियार में है फिजा, तू खिज़ां का जिश्म सवार दे
मुझे रूह से तू नवाज दे, मुझे जिंदगी से न कर जुदा
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
तेरा हुस्न जब से मेरी आँखों में समाया है,
मेरी पलकों पे एक सुरूर सा छाया है,
मेरे चेहरे को हसीन नूर देने वाले,
ये तेरे दीदार के लम्हों का सरमाया है!
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मुझको नहीं जरूरत किसी कलम की तेरी तारीफ बयां करने के लिए

तेरी अदाएं, तेरे ये नाज़नीन से अन्दाज़,
अपनी अदा आप रखते हैं
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सोचता हु हर कागज पे तेरी तारीफ करु, फिर खयाल आया कहीँ पढ़ने वाला भी तेरा दीवाना ना हो जाए।
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लिखी कुछ शायरी ऐसी तेरे नामसे…. कि…जिसने तुम्हे देखा भीनही,उसने भी तेरी तारीफ कर दी..!!
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ये सोचकर रोक लेता हूँ कलम को, तेरी
तारीफ लिखते लिखते,.. की कहीं इन
लफ़्ज़ों को सबसे बेहतरीन .. होने का गुमान
ना हो जाये
*** Husn ki Tareef Hindi Shayari
ना चाहते हुए भी आ जाता हैं लबों पे
तेरा नाम…….
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कभी तेरी तारीफ में तो कभी तेरी
शिकायत में……..!!
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तस्वीर बना कर तेरी आस्मां पे टांग आया हूँ ,
और लोग पूछते हैं आज चाँद इतना बेदाग़ कैसे है
***
चाँद की चाँदनी हो तुम.. तारो की रोशनी हो तुम..
सुबह की लाली हो तुम… मेरे दिल में बसी हुई एक आशिक़ी हो तुम
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