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अभी दर्द उठेगा तेरे आने से, अभी सर्द हो जाएंगी निगाहें

अभी दर्द उठेगा तेरे आने से, अभी सर्द हो जाएंगी निगाहें
और एक आग तड़प उठेगी सीने को हौले-हौले जलाती हुई
तुम हथेलियों में हिज्र का चराग़ लेकर आओगी चुपके से
अपनी सूरत को लाल चुनर की घूंघट में हया से छुपाती हुई
 
बस यूं ही छुपाते जाने से सुलझती हैं इश्क की उलझी राहें
तुम गुमसुम रहो, हम चुप रहें, घुटती रहे दिल में कई बातें
जो तुम कह न सको, हम सुन लें, यही आशिकी का जुनून है
तुम मेरे जिस्म में नहीं, दिल में हो, इसी में रूह को सुकून है
तुम्हारा जिस्म कोई छीन ले मुझसे, मगर मेरा दिल तुम्हारा है
तुम अपना सब कुछ गैरों पे लुटाओ, ये सितम भी हमें प्यारा है
जहां तेरी जुस्तजू है, तेरी मंजिल है, तेरी ख्वाहिश है, आरजू है
अपने हर ख्वाब को हमने उन्हीं आईनों में तो संवारा है
अभी तुम दूर कहीं हो तो गुलिस्तां में बहार आनी बाकी है
तेरी सूरत पे छाए पर्दे को अपनी उंगलियों से उठाना बाकी है
तुम खामोश हो और हम खामोश हैं, इंतजार के आंसू लिए
तुझे महसूस कर भी नजरों से दीदार करना बाकी है
हम चराग भी जलाते हैं आशियां में तेरा नूर समझकर
हम अश्क भी बहाते हैं बस तेरे करम का लहू समझकर
अपने हर सज़दे में मेरी दुआओं ने तेरा नाम पुकारा है
अपने मसज़ूद की तस्वीर में ऐ हुस्न हमने तुमको ही उतारा है
अब दिल को बस तेरा ही सहारा है, बस तेरा ही सहारा है।
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