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हर उदासी इश्क की एक फरियाद है

कहां से अश्क के तारे निकलके आए हैं
कहां से बर्फ के आतिश पिघलके आए हैं
तेरे गाल गर्म हो रहे हैं जिस पानी से
वो किस आग का भेष बदलके आए हैं

ना मरहम लगा मेरे कलेजे पे
ये आग तेरे बदन को छू जाएगी
तब जलने लगेगी तू भी इश्क में
और मेरी तरह खाक हो जाएगी

हर खामोशी एक मुकम्मल आवाज है
हर उदासी इश्क की एक फरियाद है
इस रेत की दुनिया में प्यास का हर कतरा
तेरी आंखों में बस जाने को बेताब है

मुस्कुराते हुए जीने की तमन्ना किसे नहीं होती
रूलाने के लिए तो हर लम्हां ये जमाना बैठा है
अपने-पराए भी, दोस्त-दुश्मन, मेरा साया भी
सबने सबके दिल पे दर्द का फसाना लिखा है
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