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एक लघु प्रेम कथा, शरारती नटखट रोमांटिक सा..

वो लड़का हर शाम को प्रेम सिनेमा हाल जाता था .....अगर किसी दिन न जा पाए तो उस दिन उसे दिन अधूरा सा लगता .....वजह फिल्म देखना नही होता था ....उस सिनेमा हाल के सामने एक चूड़ियों की दुकान थी जिसमे एक बेहद खूबसूरत लड़की चूड़ियाँ बेचती .....लड़का हर शाम फिल्म के बहाने उसे भी नजर भर देख लेता ....लड़का अभी मोहब्बत के पहले पायदान पर था ....अब इश्क अपने साथ उतावलापन लेकर आता ही है ...तो लड़के ने एक दिन सोचा कि वो किसी तरह लडकी से बात करें ......लडके ने फैसला किया कि वो चूड़ी खरीदने जायेगा और मौका देख कर प्यार का इज़हार करेगा ...
लड़का शाम को चूड़ियों की दुकान पर था .....उसके कदम डगमगा रहे थे ....डरते डरते वो दुकान में दाखिल हुआ...उसने लडकी की ओर देखा और बोला ..चूड़ियाँ दिखा दीजिये .लड़की ने पूछा ....कितने साइज़ की चूड़ी चाहिए ....लड़के ने कहा-साइज़ तो नही मालूम ....इसपर लड़की बोली नाप के बिना कैसे चूड़ी खरीदने आए हो....लड़के ने कहा - अरे मैं पूछना भूल गया मगर आपको जो चूड़ियाँ सही बनती है वही दे दीजिये शायद काम बन जाये ...लड़की बेबाक थी तो बोल पड़ी ....मैं जानती हूँ तुम मुझसे मिलने आए हो .....जनाब दौर बदल गया है ...आशिकी के तरीके बदलिए .....फिल्म देखने के बहाने हमे देखने आते हो ....मोहब्बत में बहाने की जरूरत नही .....
आगे लडकी ने कहा -कल से दोनों चलेंगे साथ फिल्म देखने .......
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