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Mix Shayri collection 11 / मिक्स शायरी संग्रह 11

कौन कहता है की खूबसूरती… उम्र की मोहताज है …..
हमने आज भी पुराने पन्नो पर, नए अफसाने लिखे देखे है..

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इतने कहाँ मशरूफ़ हो गए हो तुम;
आजकल दिल तोड़ने भी नहीं आते!

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बड़े सुकून से वो रहता है आज कल मेरे बिना,
जैसे किसी उलझन से छुटकारा मिल गया हो उसे..!

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टूटा हुआ फूल खुश्बू देता है;
बीता हुआ पल यादें देता है;
हर शख्स का अपना अंदाज़ होता है;
कोई प्यार में ज़िंदगी, तो कोई ज़िंदगी में प्यार दे जाता है !!!

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मेरी दोस्ती का फायदा उठा लेना, क्युंकी
मेरी दुश्मनी का नुकसान सह नही पाओग..

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मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।।
हर किसी से ,रास्ता पूछना ,अच्छा नहीं होता ।

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रंज ये नही कि जो मिले वो पत्थर के लोग थे,
अफ़सोस ये है कि उनमे चंद मेरे घर के लोग थे…!!

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मिट्टी के खिलौने भी सस्ते ना थे मेले में,
माँ-बाप बहुत रोये घर आ के अकेले में
!

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“खुल जाता है तेरी यादों का बाज़ार हर शाम,
फिर मेरी रात इसी रौनक मे गुजर जाती है”

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सिर्फ हम ही क्यूं रहे नशे में ए साकी..
एक जाम वहां भी दे , के मुहब्बत उन्हें भी थी…

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पहले इश्क फिर धोखा फिर बेवफ़ाई,
बड़ी तरकीब से एक शख्स ने तबाह किया..

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आये थे हंसते खेलते मैखाने में ‘फिराक’
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गये

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जहासे तेरी बादशाही खत्म होती है
वहासे मेरी नवाबी सुरु होती है

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मोहब्बत को इसकी बदमिज़ाजी ने ही बदनाम कर रखा है, क़दरदानों से कोसों दूर पड़ी रहती है बे-क़द्रों की ‘जूतियों’ के नीचे…!!

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अगर अलग होना इतना आसान होता तो रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते न आते।
बस इतनी इनायत बख्शना तू “मेरे नाम” को ऐ
खुदा,,,,,,,
कि जिसके भी लबों पे उभरे “मुस्कराहट” के साथ उभरे !!”

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वक्त पे न पहचाने कोई ये अलग बात,
वैसे तो शहर में अपनी पहचान बहुत हैं।।।

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हमारा दुश्मन हमसे बोला
“बहुत महंगी पड़ेगी तुझे दुश्मनी मेरी “…
हमने उसको उत्तर ये दिया कि ”
सस्ती चीज हम कभी खरीदते ही नहीं”

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“इश्क” ‘महसूस’ करना भी इबादत से कम नहीं..
ज़रा बताइये ‘छू कर’ खुदा को किसने देखा है..

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हक़ीकत से बहोत दूर है ख्वाहीश मेरी,
फिर भी ख्वाहीश है कि एक ख्वाब हक़ीकत हो जाये।

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उसकी निगाहों में इतना असर था खरीद ली उसने एक नज़र में ज़िन्दगी मेरी.

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हमें पसन्द नहीं जंग में भी चालाकी,यारो….
जिसे निशाने पे रखते हैं, बता के रखते हैं…..!

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“रहे सलामत जिंदगी उनकी,
जो मेरी खुशी की फरियाद करते है.

ऐ खुदा उनकी जिंदगी खुशियों से भरदे,
जो मुझे याद करने में अपना एक पल बर्बाद करते है…..!!

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भूल सकते हो तो भूल जाओ ,
इजाज़त है तुम्हे,
न भूल पाओ तो लौट आना ,
एक और भूल कि इजाज़त है तुम्हे…

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बरबाद कर देगी ये दोनों की लड़ाई मुझे।।
न ईश्क हार मानता है और ना दिल शिकस्त का आदि है।।

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वक्त मिले कभी तो कदमों तले भी देख लेना,
बेकसूर अक्सर वहीं पाये जाते हैं..

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मेरी मौत की ख़बर देना उन्हें मगर इन
अलफ़ाज़ में……!
तुम्हारा बरसों का जो अरमान था अब
पूरा हो गया ….!!

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क़ायनात की सबसे महंगी चीज एहसास है
जो दुनिया के हर इंसान के पास नहीं होता

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सुनते हैं कि मिल जाती है हर चीज़ दुआ से;
इक रोज़ तुम्हे मांग के देखेंगे खुदा से।

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झूठ कहते हैं लोग कि मोहब्बत सब कुछ छीन लेती है,
मैंने तो मोहब्बत करके, ग़म का खजाना पा लिया ।

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जिन्दगी जख्मो से भरी है, वक़्त को मरहम बनाना सिख लें.
हारना तो है मोतके सामने, फ़िलहाल जिन्दगी से जीना सिख लें….!!

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मैं चुप रहा और ग़लतफ़हमी बढ़ती गयी
उसने वो भी सुना जो मैंने कभी कहा ही नहीं…

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दिल भी कमाल करता है,
जब खाली खाली होता है , भर आता है!

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मोहब्बत ज़िन्दगी बदल देती है …..

मिल जाये तब भी ….!!!
ना मिले तब भी ….!!!

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आसमान में उड़ने की मनाही नहीं है,
शर्त इतनी है की ज़मीन को नजर अंदाज़ ना करे…

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रोज़ इक ताज़ा शेऱ कहां तक लिखूं तेरे लिए, तुझमें तो रोज़ ही एक नयी बात हुआ करती है

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इक मशवरा चाहिए था साहेब !
दिल तोड़ा है इक बेवफा ने , जान दे दूं या जाने दूं ।

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मैने ही दुआ मांगी उसकी खुशी की खातिर !!

वो मेरे बिना आज खुश है तो फिर ये जलन कैसी !

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” सागर के किनारो पे खजाने नहीं आते।
पल जो फीसल गये हाथ से वो दुबारा नहीं आते।

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“जी भर के जीलो इन हसी पलो को जनाब।
क्योंकी….
फीर लौटके वो दोस्ती के जमाने नहीं आते।”

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यु तो क्या कहे की जिंदगी ने इम्तेहान बहुत लिए…
आँखों में आंसू कम, पर दिल पे जख्म कई दिए…

हर पर ख़ुशी की तलाश में भटकती रही जिन्दगी…
ख़ुशी न मिली, तो गम छुपाने के लिए मुस्कुरा दिए…

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“माचिस की ज़रूरत यहाँ नहीं पड़ती…
यहाँ आदमी आदमी से जलता है…!!”

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दुनिया के बड़े से बड़े साइंटिस्ट, ये ढूँढ रहे है की मंगल ग्रह पर जीवन है या नहीं,

पर आदमी ये नहीं ढूँढ रहा कि जीवन में मंगल है या नहीं।

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इश्क करो तो होम्योपैथिक वाला करो ,
फायदा ना हो तो नुक्सान भी ना हो…

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पैर की मोच और छोटी सोच – हमें आगे बढ़ने नहीं देती…

टुटी कलम और औरो से जलन – खुद का भाग्य लिखने नहीं देती…

काम का आलस और पैसो का लालच – हमें महान बनने नहीं देता…

अपना मजहब उंचा और गैरो का ओछा – ए सोच हमें इन्सान बनने नहीं देती

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पलकों में आँसु और दिल में दर्द सोया है,
हँसने वालो को क्या पता, रोने वाला किस कदर रोया है,
ये तो बस वही जान सकता है मेरी तनहाई का आलम,
जिसने जिन्दगी में किसी को पाने से पहले खोया है..!!

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तुम शराफ़त को बाज़ार में क्यूँ ले आए हो, दोस्त…
ये सिक्का तो बरसों से नहीं चलता…!!

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ये तो शौक है मेरा ददॅ लफ्जो मे बयां करने का
नादान लोग हमे युं ही शायर समझ लेते है

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रकीबों के सर गलत इल्जाम ए बेवफाई है
गैरों ने तो सिर्फ हवा दी है..आग तो अपनों ने
ही लगायी है….!!!

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जो घरों को छोड़ के है चले
उन्हें क्या सतायेगे फासले ।।।
~ जावेद अख्तर

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मरहम न सही एक जख्म ही दे दो
महसूस तो हो की हमे तुम भूले नहीं हो..

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“शाम के बाद मिलती है रात,
हर बात में समाई हुई है तेरी याद.
बहुत तनहा होती ये जिंदगी,
अगर नहीं मिलता जो आपका साथ.”

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“ज़िंदगी से यू चले है इल्ज़ाम लेकर,
बहुत जी चुके उसका नाम लेकर,
अकेले बाते करेंगे वो इन सितारो से,
जब हम चले जाएँगे उन्हे सारा आसमान देकर”

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अहंकार में तीन गए;
धन, वैभव और वंश!
ना मानो तो देख लो;
रावन, कौरव और कंस!

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