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Mix Shayri collection 2 / मिक्स शायरी संग्रह 2

जिसके पास थोडा है वह गरीब नही है, लेकिन जो अधिक पाने की इच्छा रखता है वह गरीब है |
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वो मोहब्बत के सौदे भी अजीब करता है;
बस मुस्कुराता है और दिल खरीद लेता है
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ख़बरदार दुबारा मुहब्बत न करना
जरुरी नहीं हर बार खुदकुशी की कोशिश
करके जिन्दा बच जाओगे
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साँचे में किसी और की मुहब्बत के हमने , खुद को कभी ढलने नहीं दिया ,
आँखों को आज भी तेरा इन्तजार है कि गुलाल किसी को मलने नहीं दिया
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सोचते है, अब हम भी सीख ले यारों बेरुखी करना,,,,,,
सबको मोहब्बत देते-देते, हमने अपनी कदर खो दी है,,,,,,!
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किताबों की तरह हैं हम भी….
अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
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बारूद मेरे अन्दर का भीग गया तेरे आंसुओं से वरना ये दिल एक बड़ी घटना को अंजाम दे देता…!!!!
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कभी जिंदगी में किसी के लिये मत रोना, क्योंकि वो तुम्हारे आँसुओं के क़ाबिल ना होगा और जो इन आँसुओं के क़ाबिल होगा, वह तुम्हें रोने ही नहीं देगा ।
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छोड दी हमने हमेशा के लिए उसकी आरजू करना…
जिसे मोहब्बत की कद्र ना हो उसे दुआओ मे क्या मांगना…
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इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है..!
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मुझे नींद की इजाज़त भी उसकी यादों से लेनी पड़ती है;
जो खुद तो सो जाती है, मुझे करवटों में छोड़ कर!
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काश की बचपन में ही तुझे मांग लेते..
हर चीज मिल जाती थी दो आसूं बहाने से..
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“मतलबी लडकी से अच्छी तो मेरी सिगरेट हे
यारो……..
जो मेरे होठ से अपनी जिंदगी शुरू करती हे ओर
मेरे कदमो के नीचे अपना दम तोड देती हे…!”
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साथ छोडने वालो को तो बस.. ऐक बहाना चाहिए।
वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाझे तक साथ नही छोडते।
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“नदी जब किनारा छोड देती हैं,
राह की चट्टान तक तोड देती हैं,
बात छोटी सी अगर चुभ जाए दिल में तो,
जिंदगी के रास्तों को भी मोड देती हैं.”
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“हम अपना दर्द किसी को कहते नही,
वो सोचते हैं की हम तन्हाई सहते नही,
आँखों से आँसू निकले भी तो कैसे,
क्योकि सूखे हुवे दरिया कभी बहते नही.”
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“थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी
मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे…!!”
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या खुदा ‘दिल’ तो तुडवा दिया तूने इश्क के चक्कर में
कम से कम ‘लीवर’ तो संभालना दारु पीने के लिए.
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खुशनसीब वो नहीं. जिसका नसीब अच्छा है . खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है
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है .. कोई वक़ील .. इस जहान में … दोस्तों .. जो हारा हुआ इश्क़ जिता दे मुझको !
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इश्क और सुकून, वो भी दोनों एक साथ ?
रहने दो यारों, कोई अक्ल वाली बात करो.. !!
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हजार जवाबों से अच्छी है खामोशी,ना जाने कितने सवालों की आबरू रखती है…
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ढूंढ रहा हूँ मगर नकाम हूँ अब तक!
वो लम्हा, जिस्मे तुम याद न आये हो!
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दरिया ने झरने से पुछा …
तुझे समन्दर नहीं बनना है क्या ?
झरने ने बडी नम्रता से कहा …
बडा बनकर खारा हो जाने से अच्छा है
कि मैं छोटा रह कर मीठा ही रहुं …
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बस इतनी सी बात पर हमारा परिचय तमाम होता है !
हम उस रास्ते नही जाते जो रास्ता आम होता है…!!!!
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जिंदा रहे तो हर दिन तुम्हे याद करेंगे,
भूल गये तो ये
समझ लेना, खुदा ने हमें याद कर लिया….
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ग़ज़ब की एकता देखी लोगों की ज़माने में ..
ज़िन्दों को गिराने, मुर्दों को उठाने में ..
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आंधियों से न बुझूं ऐसा उजाला हो जाऊँ,वो नवाज़े तो जुगनू से सितारा हो जाऊँ,एक क़तरा हूँ मुझे ऐसी सिफ़त दे मौला,कोई प्यासा दिखे तो दरिया हो जाऊँ।
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मेरी चाहत ने उसे खुशी दे दी,
बदले मे उसने मुझे खामोशी दे दी.
खुदा से दुआ माँगी मरने की,
लेकिन उसने भी तड़पने के लिए ज़िंदगी दे दी …
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गुमान न कर अपनी खुश-नसीबी का, खुदा ने गर चाहा ;
तो तुझे भी इश्क होगा.
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मैं फकीरों से भी सौदा करता हूँ अक्सर…..
जो एक रुपये में लाख दुआएं देता है……. .!!
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ख्वाइशों से भरा पड़ा है घर इस कदर,,
रिश्ते ज़रा सी जगह को तरसतें हैं.!!!!!
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“इसी लिए तो बच्चों पे नूर सा बरसता है,
शरारतें करते हैं, साजिशें तो नहीं करते….!!
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“तू अचानक मिल गई तो कैसे पहचानुंगा मैं,
ऐ खुशी.. तू अपनी एक तस्वीर भेज दे….!!!!
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मोबाइल चलाना जिसे सिखा रहा हूँ मैं,
पहला शब्द लिखना उसने मुझे सिखाया था….!!!!
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नींद आए या ना आए, चिराग बुझा दिया करो,
यूँ रात भर किसी का जलना, हमसे देखा नहीं जाता….!!!!
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मुलाकात जरुरी हैं, अगर रिश्ते निभाने हो,
वरना लगा कर भूल जाने से पौधे भी सुख जाते हैं….!!!!
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जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं,
मै खुद को नही देखता औरो की नजर से….!!!!
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ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले,
उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने….!!!!
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हज़ारों ऐब ढूँढ़ते है हम दूसरों में इस तरह,
अपने किरदारों में हम लोग,फरिश्तें हो जैसे….!!!!
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“दिन बीत जाते हैं सुहानी यादें बनकर,
बातें रह जाती हैं कहानी बनकर,
पर दोस्त तो हमेशा दिल के करीब रहेंगे,
कभी मुस्कान तो कभी आखों का पानी बन कर.”
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लगता है तन्हाई में आहें, भरे जा रहे हैं,
याद कर के रात हिज्र की, सहे जा रहे हैं,
दिल की तबाही का, हुआ हादसा शहर में,
अब गाँव की मिटटी से भी, डरे जा रहे हैं,…
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