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Mix Shayri collection 24 / मिक्स शायरी संग्रह 24

“मैं कभी नहीं देखता की क्या किया जा चुका है;

मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है”

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लोग वाकिफ हे मेरी आदतों से ..
रुतबा कम ही सही पर, लाजवाब रखते है……

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मैं हूँ, दिल है, तन्हाई है
तुम भी होते, अच्छा होता..

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खुबसुरती के तो हर कोई आशिक होते हैँ।
किसी को खुबसुरत बनाकर इश्क किया जाय तो क्या बात है.

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“दुनिया में बहुत से लोग आईना देख कर डर जाते,
……….अगर……….
आईने में चेहरा नहीं चरित्र दिखाई देता…..!!

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तन्हाई में भी कहते है लोग,
जरा महफ़िल में जिया करो.

पैमाना लेके बिठा देते है मैखाने में,
और कहते है जरा तुम कम पिया करो….

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अक्सर वही लोग उठाते हैं हम पर उंगलिया…
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती…

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सूरज ढला तो, कद से ऊँचे हो गए साये,
कभी पैरों से रौंदी थी, यही परछाइयां हमने…

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ये मोहब्बत का बंधन भी कितना अजीब होता है
मिल जाये तो बातें लम्बी, और बिछड़ जाये तो यादें लम्बी….!!

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तौहीन न करना कभी कह कर “कड़वा” शराब को…

किसी ग़मजदा से पूछियेगा इसमें कितनी मिठास है…

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कोई ताल्लुक न जोड़ो मगर सामने तो रहो…..

तुम अपने गुरूर में खुश, और हम अपने सुरूर में खुश !!!!

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रूठा हुआ है मुझसे इस बात पर ज़माना,
शामिल नहीं है मेरी फ़ितरत में सर झुकाना.

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हाँ वो तुमने इक दवा बतलायी थी गम के लिए,
गम तो ज्यूँ का त्यूं रहा बस हम शराबी हो गए ….!

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फर्क बस अपनी अपनीसोच का है….
वर्ना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती….!!

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उदास दिल है मगर मिलता हूँ हर एक से हंस कर…
यही एक फन सीखा है बहुत कुछ खो देने के बाद…

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हमारे होसलो की दाद दुनिया को आँधिया देंगी।
अभी इज्ज़त से हमारा नाम तूफान लेता है।

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हम ने एक असूल पे सारी उम्र गुज़ारी है;
जिस को अपना जान लिया फिर उस को परखा नहीं..

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वो कहते हैं हम उनकी झूठी तारीफ़ करते हैं
ऐ ख़ुदा एक दिन आईने को भी ज़ुबान दे दे..

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मांग कर मैं न पियूं तो यह मेरी खुद्दारी है,
इसका मतलब यह तो नहीं है कि मुझे प्यास नहीं!”

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आँख उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले;​​
जबरन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं…

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दो दिन का कर के इश्क़ ज़िन्दगी भर का ग़म दे दिया..
कमबख्त इतना सूद तो किसी मुनीम ने भी ना लिया…

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अपने बस में कुछ नहीं, इतना कहना मान..
वक़्त बजाए डुगडुगी, नृत्य करे इन्सान !!

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मेरी यादों से अगर बच निकलो तो वादा है मेरा तुम से ,

मैं खुद दुनिया से कह दूँगा कमी मेरी वफ़ा में थी …

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मुझ से दुरीयां बना कर तो देखो,,

फिर पता चलेगा िकतना नज़दीक़ हुँ मै..

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अंजाम कि परवा होती तो हम इश्क करना छोड देते…..
इश्क ज़िद करता है और ज़िद के हम पक्के है….!

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कुछ लोग मुझे अपना कहा करते थे,
सच में वो लोग सिर्फ कहा करते थे।

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मैं न अन्दर से समंदर हूँ न बाहर आसमान,

बस मुझे उतना समझ जितना नज़र आता हूँ मै ……

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