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Mix Shayri collection 3 / मिक्स शायरी संग्रह 3

मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे…
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ऐ ईश्क सुना था के… तु अंन्धा है
फिर मेरे धर का राश्ता तुजे कीसने बताया!!!?
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आपके आने से ज़िंदगी कितनी खूबसूरत है,
दिल मे बसी है जो वो आपकी ही सूरत है,
दूर जाना नही हमसे कभी भूलकर भी,
हमे हर कदम पर आपकी ज़रूरत है.
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पानी फेर दो इन पन्नों पर, ताकि धुल जाए सियाही सारी
ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन होता है कभी-कभी !!
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उसने पुछा : कहाँ रहेते हो..?
मैने कहा: अपनी औकात मे..रहेता हुं
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लग जाए जमाने की हवा, जाने कब उसको…
वो शक्स भी इंसान है, कुछ कह नहीं सकते !!
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वैसा ज़माना आ गया जैसा सूना था
रोग सस्ते और दवा महँगा हो गया
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ज़िन्दगी भर के इम्तिहान के बाद,,
वो नतीजे में किसी और के निकले..
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“तन जला कर रोटियां पकाती है माँ
नादान बच्चे अचार पर रूठ जाते हैं |”
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खुदा ने मुझे वफादार दोस्तों से नवाज़ा है ….
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याद मैं ना करूँ, तो कोशिश वो भी नहीं करते ….. !!
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अंगुलिया टूट गई …पत्थर तराशते तराशते … दोस्त
जब बनी सूरत यार की ..तो खरीददार आ गये !!
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मै!खाने मे आऊंगा मगर…पिऊंगा नही साकी…
ये शराब मेरा गम मिटाने की औकात नही रखती…
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पुराने रिवाजों कों अब कौन जिन्दा रखता है,
खोटे सिक्कों का हिसाब अब कौन रखता है ,
कुछ लोंग भी होते हों खोटे सिक्कों कि तरह ,
भला उन्हें अपने बटुए की पनाह में अब कौन रखता है!!!!!!
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जिंदगी तो उसकी है जिसकी मौत पे जमाना अफसोस करे,
वरना जनम तो हर किसी का मरने के लिए ही होता है…
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बरसी मनाने आ ही जाओ,
वापस दिन आ गया जुदा होने वाला
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सीख रहा हूं अब मैं भी इंसानों को पढने का हुनर
सुना है चेहरे पे किताबों से ज्यादा लिखा होता है!
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हसरत-ए-दीदार के लिये हमने उसकी गली में मोबाईल की दुकान खोली,
मत पूछो अब हालात-ए-बेबसी हमारी गालिब,रोज़ एक नया शख्स उनके नम्बर पे रीचार्ज़ करवाने आता है !
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मैं चलते-चलते इतना थक गया हूँ, चल नहीं सकता, मगर मैं सूर्य हूँ, संध्या से पहले ढल नहीं सकता.
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बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ अपने आप में लेकिन..
बस तुमको याद करने की वो आदत अब भी है..
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“सीना तान ” हु , पर “सेतान” नही हु
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किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ;
बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !
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बहुत शौक से उतरे थे इश्क के समुन्दर में..!!
एक ही लहर ने ऐसा डुबोया कि आजतक किनारा ना मिला.!!
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जिन्दगी बैठी थी अपने हुस्न पै फूली हुई,
मौत ने आते ही सारा रंग फीका कर दिया।
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हम ये नहीं चाहते की कोई आपके लिए ‘दुआ’ ना मांगे
हम तो,
बस इतना चाहते है की
कोई ‘दुआ में ‘आपको’ ना मांगे ..
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अब इन आँखों से भी जलन होती हैं मुझे !
खुली हो तो याद तेरी, और बंद हो तो ख्वाब तेरे !
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“हर नज़र को 1 निगाह का हक़ है,
हर नूर को 1 आह का हक़ है.
हम भी दिल लेकर आये है इस दुनिया में,
हमे भी तो 1 गुनाह का हक़ है”
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‘कभी वक्त मिले तो रखना कदम ,
मेरे दिल के आगंन में !
हैरान रह जाओगे मेरे दिल में ,
अपना मुकाम देखकर’
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” मत किया करिये दिन के
उजालों की ख्वाहिशें ऐ हजूर,
ये आशिक़ों की बस्तियाँ हैं
यहाँ चाँद से दिन निकलता हें”
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तेरे हुस्न की क्या तारीफ़ करूँ
कुछ कहते हुए भी डरता हूँ
कहीं भूल से तू ना समझ बैठे
की मैं तुझसे मोहब्बत करता हूँ.
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तुम दिल से हमें यों पुकारा ना करो, यु तुम हमें इशारा ना करो..
दूर हैं तुमसे ये मजबूरी है हमारी,
तुम तन्हाइयों में यूं तडपया ना करो…
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