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Mix Shayri collection 8 / मिक्स शायरी संग्रह 8

कल न हम होंगे न कोई गिला होगा !
सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा !!

जो लम्हे हैं चलो हँस कर बिता ले…!
जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा !

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तुम ना-हक नाराज़ हुए, वरना मयखाने का पता,
हमने हर उस सख्स से पुछा, जिसके नैन नशीले थे..

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रात क्या ढली कि सितारे चले गये, गैरों से क्या कहें हम जब अपने ही चले गये,
जीत तो सकते थे हम भी इश्क की बाज़ी, पर तुम्हे जितने के लिए हम हारते चले गये

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मंदिर में फूल चढ़ा कर आए तो यह एहसास हुआ कि…
पत्थरों को मनाने, फूलों कि क़त्ल कर आए हम ।

गए थे गुनाहों की माफ़ी माँगने ….
वहाँ एक और गुनाह कर आए हम

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नींदे गिरवी हैं उस के पास,
जिस से मोहब्बत का क़र्ज़ लिया था……

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“तन्हाईयां जाने लगी जिंदगी मुस्कुराने लगी,
ना दिन का पता है ना रात का पता.
आप की दोस्ती की खुशबू हमे महकाने लगी,
एक पल तो करीब आ जाओ धड़कन भी आवाज़ लगाने लगी.. ”

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उम्र की राह पर रस्ते बदल जाते है,
वक़्त की आंधी मे इंसान बदल जाते है,
हम सोचते है आपको इतना याद ना करे,
लेकिन आँखे बंद करते ही इरादे बदल जाते है

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कोशिशें मुझको मिटाने की भले हों कामयाब
मिटते-मिटते भी मैं मिटने का मजा ले जाऊँगा

शोहरतें जिनकी वजह से दोस्त दुश्मन हो गये
सब यही रह जायेंगी मैं साथ क्या ले जाऊँगा __

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“ज़िन्दगी मे कई मुशकिले आती है,
और इन्सान ज़िन्दा रहने से घबराता है,
ना जाने कैसे हज़ारो कांटो के बीच,
रह कर भी एक फूल मुस्कुराता है.”

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रेत की जरूरत रेगिस्तान को होती है,
सितारों की जरूरत आसमान को होती है,
आप हमें भूल न जाना, क्योंकी
दोस्त की जरूरत हर इंसान को होती है…….

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मेरे आंसू और तेरी यादों का कोई तो रिश्ता जरूर है..
कमबख्त जब भी आते है दोनों साथ ही आते है………

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तुम्हारा वो पुराना साथ अब न मिलेगा मुझे,
शायद इसलिए तेरी यादों के साथ सो रहा हूँ मैं।
सच में,जबसे हुए हो दूर तुम जिंदगी से मेरी,
कैसे कहूँ की कितना अकेला सा हो गया हूँ मैं।

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ना दौलत पे नाज करते है,
ना शोहरत पे नाज करते है,
भगवान ने हिंदू के घर पैदा किया है,
इसलिए अपनी किस्मत पे नाज करते है..
जय श्री राम…

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तुझे तो हमारी मोहब्बत ने मशहूर कर दिया बेवफ़ा
वरना तू सुर्खियों में रहे, तेरी इतनी औकात नहीं!!!

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अपनी खुशियों की चाबी किसी को न देना ।

लोग अक्सर दूसरों का सामान खो देते है.

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किताबों की तरह बहुत से अलफ़ाज़ हैं मुझ में,

और किताबों की तरह ही में खामोश रहता हूँ…!

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फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में;
फर्क होता है किस्मत और लकीर में;
अगर कुछ चाहो और ना मिले;
तो समझ लेना कि कुछ और
अच्छा लिखा है तक़दीर में।

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दुश्मनों के खेमे में चल रही थी मेरे क़त्ल की साज़िश
मैं पहुँचा तो वो बोले ” यार तेरी उम्र लम्बी है ”

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माँगना भूल न जाऊँ तुम्हें हर नमाज़ के बाद..
इसलिये मैंने तुम्हारा नाम ‘दुआ’ रख दिया…

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वोह अल्फ़ाज़ ही क्या जो समझानें पढ़ें,
हमने मुहब्बत की है कोई वकालत नहीं ।

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“मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं है…

चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए…”

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मुझे अपनी मौत का तो कोई गम नहीं है लेकिन,

तेरे आशियां पे मरते तोकुछ और बात होती….

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कितने नाजुक मिजाज है
वो कुछ न पुछीये
निंद नही आती है
उन्हे धड़कन के शौर से

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दोस्ती तो ज़िन्दगी का वो खूबसुरत लम्हा है,
जिसका अंदाज सब रिश्तों से अलबेला है,
जिसे मिल जाये वो खुश…………,
जिसे ना मिले वो लाखों में अकेला है|

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