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♥ मेरा पहला प्यार My First Love ♥

ये कहानी मेरी अपने पहले प्यार से पहली मुलाकात की है. मैं तब दसवी कक्षा मै पढता था जब ये हादसा हुआ. मैं स्कूल से वापिस अपने घर जा रहा था. मैं साइकिल से घर जाता था अपने दोस्तों के साथ. उस दिन बारिश हो रही थी. तो हम बहुत तेज़ी से घर भाग रहे थे. तभी मेरी साइकिल के सामने एक गाडी आ गयी और मैं उससे टकरा गया. मुझे चोट नहीं लगी पर मै बहुत गुस्से मै था. तो सीधा गाडी वाले पे चिल्लाने लगा. तो एकदम से गाडी से एक लड़की उतरी. उसकी उम्र मेरे जितनी ही थी. उसके पापा ने मुझसे माफ़ी मांगी और बताया की वो बस अबी गाडी चलाना सीख ही रही है. मैंने उसकी आँखों मै देखा जिसमे पानी आ गया था. वो डर गयी थी. मैंने उससे माफ़ी मांगी और कहा मुझे चिल्लाना नहीं चाहिए था. jab मैं घर पंहुचा तो उस हादसे, उस लड़की के बारे मै ही सोचता रहा. वो बहुत सुन्दर थी, एक फूल की कली की तरह.
 
कुछ दिनों मे मैंने उसके बारे मे सोचना छोड़ दिया. पर हुआ ऐसा की दसवी की परीक्षा के बाद मैं एक समर कैंप गया. वहा मैं गिटार सीखने गया था और वह गाने. तो कभी कभी हमारी कक्षा साथ होती थी. हम बजाते थे, वह गाते. मेरी उससे फिर से मुलाकात हुई.हम दोनों को गाडी का हादसा याद आया और हम काफी हसे भी. कुछ ही दिनों मे हम आपस मे बहुत बाते करने लगे. हम कभी कभी अपनी क्लास भी छोड़ देते थे. वो समय बहुत अच्छा था. हम एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे. मैं चाहता था की उससे पुछु क्या वो मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी, पर डरता था. मैं पहले पक्का होना चाहता था की हां ही बोले. तो मैं पूरा कैंप बस रुका.

समर कैंप क बाद भी हम मिलते थे. मैंने पूरी योजना बना ली थी. मैं उसके ट्यूशन मे आजाऊंगा. और उसकी गाने की क्लास मे भी. वो भी यही चाहती थी, उसने कई बार बोला था. एक शाम हम पास की झील के किनारे बैठे थे जब मैंने उससे बोला की कल मैं उससे मिलना चाहता हु रात मे, और मुझे उससे कुछ ज़रूरी बात पूछनी है. वो मान गयी.

अगली रात मैं उसी झील के किनारे खड़ा था. हाथ मे गुलाब था, चॉकलेट्स थी, और सिनेमा की टिकट्स भी. सब सही था, बस वो ही नहीं आई. मैं पूरी रात वाही खड़ा रहा उसके इंतज़ार मे. पर वो नहीं आई. आज इतने सालो बाद मैंने यह कहानी इसलिए लिखी क्युकी मुझे पता चला वो इसलिए नहीं आई थी क्युकी उसके दादा जी उस दिन स्वर्ग सिधार गए थे. और उसी के बाद उसका ट्रांसफर. उसने मुझसे मिलने की कोशिश की थी, पर ना तो उसे समय मिल पाया, ना तब मोबाइल थे हमारे पास. 
ये बात मुझे अपने एक दोस्त से पता चली और उसको किसी और से. ये उसका एक संदेसा था मेरे लिए, जो बहुत देर मे पंहुचा मुझ तक, बहुत देर मे... 
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