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♥ वो मुहब्बत थी ♥

    ♥ वो मुहब्बत थी ♥
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    हॉस्पिटल के आई . सी . यू वार्ड में बहुत सन्नाटा पसरा हुआ हे . मौत ने अपने आने की जेसे पहले से सूचना भेज दी हे . आदित्य बिस्तर पे लेटा हुआ हे . उम्र के ५२ बसंत देख चुके आदित्य को बहुत बैचैनी सी हो रही थी . डॉक्टर ने पहले की २४ घंटे का अल्टीमेटम दे दिया था . ब्लड कैंसर का दानव एक और जिंदगी लीलने को तैयार था .
    पास में प्रसून बैठा हुआ था . बचपन से बुढ़ापे तक एक यही एसा इंसान था जो आदित्य को अच्छे से समझाता था . उसके चेहरे से उसका मन पढ़ लेता था .
    आदित्य को यू बैचैन देखकर उसने आँखों में आंसू दबाये उसके पास आकर धीरे से पूछा ,
    " किसी को बुलाना हे .............???"
    आदित्य ने ना में गर्दन हिला दी . लेकिन प्रसून समझ गया . वो तुरंत एक फ़ोन
    करने बाहर चला गया . मृत्यु से पहले इंसान का पूरा जीवन उसके सामने एक चल चित्र की तरह चलने लगता हे . आदित्य का जन्म एक पैसे वाले खानदान में हुआ पिता तहसीलदार थे. खानदानी जमीन जायजाद थी . आदित्य को कभी किसी बात की कमी न रही . जो चाहा मिला . और शायद इन बातो ने उसे थोडा सा जिद्दी बना दिया . एक बात पे अड़ जाता तो आसानी से उसे छोड़ता नहीं .
    जब कॉलेज में जाने लगा तो प्रसून के अलावा एक और इंसान उसकी जिंदगी में आया . नाम था विभा . कॉलेज में आदित्य और प्रसून के साथ ही पड़ने वाली एक बड़े डॉक्टर की बेटी . आदित्य के जेसा ही मिलता जुलता स्वभाव लेकिन उतनी अकड न थी . कुछ वक्त में उन दोनों के बीच गहरी मित्रता हो गयी . प्रसून ये सब देख रहा था पर चुप था .
    मित्रता के रंग में प्रेम की सुगंध कब घुल गयी ये आदित्य और विभा किसी को पता न चला . विभा कॉलेज में होने वाली वाद विवाद और भाषण प्रतियोगिता में जैम कर हिस्सा लिया करती थी और जीता भी करती थी . लेकिन इस बार उसके मुकाबले आदित्य था प्रतिपक्ष में . मुकाबला हुआ और पहले की तरह ही विभा की जीत हुई और आदित्य को हार का मुह देखना पड़ा . आदित्य सबके सामने विभा से मिली इस हार को स्वीकार नहीं कर पाया . अन्दर ही अन्दर उसे बहुत बुरा लगा .
    कुछ दिन बाद विभा उसे अपने मन में उठ रहे प्रेम के अंकुर के बारे में बताने उसे मिली . तो आदित्य बहुत बदला बदला सा था . विभा ने लड़की होते हुए भी पहल करते हुए कहा ,
    " में आपसे मुहब्बत करने लगी हु . मुझे लगा आपको बता दूं . आप भी मुझे मुहब्बत करते हे ये में जानती हूँ ."
    आदित्य उस हार को भुला नहीं था वो हर बार विभा की मन मर्जी नहीं चलने देगा ये सोचकर उसे कहा,
    " ये मुहब्बत नहीं सिर्फ एक दोस्ती हे विभा . गलत न समझो इसे ."
    ये कहकर वो आगे बढ़ गया . प्रसून को विभा ने सारी बात बताई और कहा की आदित्य को समझाए लेकिन प्रसून की एक बात भी आदित्य ने नहीं मानी . समय पंख लगाकर उड़ गया . विभा की शादी कहीं और हो गयी . और आदित्य ने आजीवन विवाह नहीं किया .
    आदित्य का ध्यान टुटा तो देखा हॉस्पिटल के कमरे में वो अकेला था . साँसे तेज हो रही थी . प्रसून बाहर से लौटा और ऊसके पास बैठकर रोते हुए आदित्य का हाथ पकड़कर बोला ,
    " देख यार जो बात रह गयी उसे कम से कम आज कह दे . एसे दिल में कोई बात लेकर न जाना . तुझे मेरी दोस्ती की कसम हे............. .'"
    आदित्य का शरीर काँप रहा था . एसा लग रहा था जेसे कोई जिस्म से प्राण निचोड़ रहा था . प्रसून से ये हालत देखि नहीं जा रही थी . उसने आदित्य का सर अपनी गोद में रख लिया . विदाई का वक्त आ चला था . इतने में उस कमरे के दरवाजे पर एक दस्तक हुई . हां वो विभा ही थी . शोल लपेटे आँखों में एक चस्मा चढ़ाये उसने बहुत गहरी आँखों से आदित्य की तरफ देखा . चश्मे के पीछे से आँखे भीग सी गयी . भले ही विभा अपने जीवन में आगे बाद चुकी थी लेकिन मन के किसी कोने में आदित्य का वो चेहरा आज भी था .
    प्रसून ने विभा को देखा तो उसे इशारे से पास बुलाते हुए कहा ,
    " आदित्य कुछ कहना चाहता हे तुमसे ... यहाँ आओ ..."
    विभा थोडा और करीब आई . आदित्य ने विभा का चेहरा सालों बाद देखा लेकिन उसे आज भी वही कॉलेज वाली विभा ही नजर आ रही थी . आदित्य ने कांपते हुए हाथों की हथेलियों को जोड़कर बहुत दर्द भरी आवाज में कहा ,
    " मुझे माफ़ कर देना विभा . तुम सही थी .......................
    वो मुहब्बत थी ."
    इतना कहते ही जुड़े हुए हाथ बेजान होकर बिस्तर पर गिर पड़े . प्राण पंछी उड़ चूका था . विभा की आँखों में आंसू आ गए . प्रसून अपने यार की छाती से लगकर रोये जा रहा था.
    विभा आदित्य की माफ़ी से पिघलकर आदित्य को क्षमा कर चुकी थी .
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