Weather (state,county)

आखिर किन चीजों में आज के युवा (टीनेजर) वक्त और भविष्य बर्बाद कर रहे हैं !

फुल मस्ती-नो टेंशन, डांस-म्यूजिक, धूम-धडाका, गुल-गपाडा, बाइक राइड, फन पार्टी,फ्रेंड्स, लिव लाइफ किंग साइज, जियो और जीने दो, आजादी, बेबाकी मगर जिंदगी के प्रति संजीदगी भी..यही है आज का यूथ।

वर्ष 2007 में हुए एक ग्लोबल सर्वे में कहा गया था कि भारतीय युवा विश्व का सबसे खुशमिजाज युवा है। सखी के सीधे सवालों में भी यही बात सामने आई। युवा मस्ती की रेलगाडी पर सवार हैं। यह गाडी कभी-कभी करियर या रिश्तों के धुंध वाले स्टेशनों पर थोडा ठहर जाती है, लेकिन जल्दी ही फन-मस्ती की पटरी पर फिर दौडने लगती है। कूल ड्यूड युवाओं का प्रिय शब्द है। ये खुद को शांत, समझदार और मस्तमौला मानते हैं। कडी मेहनत के बाद मौज-मस्ती और पार्टी तो बनती ही है, यही मानना है युवाओं का।

मूल मंत्र : सैटरडे : पार्टी हार्डर, रेस्ट : वर्क हार्डर, संडे : स्लीप हार्डर


गैजेट्स का नशा

गैजेट्स इनकी कमजोरी हैं। इनकी उंगलियां सधे कलाकार की तरह सेलफोन के की-बोर्ड पर थिरकती रहती हैं। अपने प्रिय गैजेट्स से दूर होते हैं तो इन्हें बहुत गुस्सा आता है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल साइट्स से दूर रहना इन्हें अपने प्रिय से बिछडने जैसा लगता है। ज्यादातर युवाओं के लिए इंटरनेट, सेलफोन और सोशल साइट्स जरूरी हैं। 95 प्रतिशत ने माना कि सेलफोन, आइपॉड, लैपटॉप से उन्हें भावनात्मक संतुष्टि मिलती है। केवल 5 प्रतिशत ने माना कि गैजेट्स न होने से उन्हें फर्क नहीं पडता।

पढ़ें >> जाने कैसे आखिर फेसबुक की लत को छोड़ें ?

हर दोस्त जरूरी होता है

आज के यूथ के लिए रिश्तों की अहमियत नहीं, यह कहना शायद जल्दबाजी होगी। वे भी रिश्तों को महत्व देते हैं। लडकियों के लिए जहां माता-पिता पहले हैं, वहीं लडकों की जिंदगी में माता-पिता और फ्रेंड्स दोनों महत्वपूर्ण हैं। हर दोस्त जरूरी होता है.., मानते हैं लडके। कई बार ऐसा लगता है मानो वे पैसे के पीछे भाग रहे हैं, लेकिन जब रिश्तों की बात आती है तो पैसा नंबर दो पर ही आता है। दोस्ती और संबंधों में वफा की तलाश उन्हें जरूर है। उनकी प्राथमिकता सूची में माता-पिता सबसे आगे हैं। 50 प्रतिशत के लिए माता-पिता पहली प्राथमिकता हैं, 45 प्रतिशत करियर और दोस्तों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं तो महज 5 प्रतिशत पैसे को सबसे महत्वपूर्ण मानते हैं।


लव या टाइमपास

काफी प्रैक्टिकल है यह पीढी। प्यार एक सुविधा का नाम है, जब तक मिल सके-ठीक है, न मिले तो कोई गम नहीं। युवाओं के लिए प्यार क्षणिक आकर्षण, लगाव, दोस्ती का एक नाम है। वैसे प्यार के नाम पर ज्यादातर लडकों को कुछ कुछ नहीं होता, लेकिन लडकियों के लिए यह खास एहसास का प्रतीक है। 50 प्रतिशत लडकियां मानती हैं कि प्रेम भावनात्मक सुरक्षा देता है, 40 प्रतिशत इसे खास भावना का नाम देना चाहती हैं जबकि 10प्रतिशत इस पर कोई राय नहीं देतीं। 55 प्रतिशत लडके प्यार को टाइमपास, क्षणिक लगाव या टाइमवेस्ट कहते हैं, 20 प्रतिशत लव की एबीसीडी नहीं समझ पाते तो 20 प्रतिशत के लिए यह सब किताबी बातें हैं। 5 प्रतिशत इस कॉलम को ही ब्लैंक छोड देते हैं। हालांकि लव की इस मैथ्स में दोनों खासे उलझे नजर आते हैं। सेक्स को लेकर भी कभी हां-कभी ना जैसी स्थिति है। लडकियां बिना प्यार के सेक्स को नो कहती हैं, तो ज्यादातर लडके इसे बेसिक नीड मानते हैं। 60 प्रतिशत लडकियां सेक्स को प्यार व परस्पर भरोसे से उपजा संबंध मानती हैं तो 40 प्रतिशत इसे शादी के बाद ही सही मानती हैं। 60 प्रतिशत लडके इसे सहज इच्छा मानते हैं। 30 प्रतिशत इसे आजमाने की इच्छा रखते हैं तो 10 प्रतिशत शादी के बाद ही सेक्स को सही मानते हैं। ज्यादातर लडकियां प्री-मैरिटल सेक्स को गलत मानती हैं, तो ज्यादातर लडके इसे एक बार ट्राई जरूर करना चाहते हैं।

पढ़ें >> पोर्न (गन्दी साईट) की लत से बचें, वरना भारी कीमत चुकानी पड़ेगी !
आजादी के नए मायने

आज के यूथ को आजादी चाहिए। आजादी पुराने विचारों और रूढियों से..। कोर्स, करियर, फ्रेंड्स, रिश्तेदार या जीवनसाथी चुनने और अपने ढंग से जीने की आजादी..। रोक-टोक और उपदेश उन्हें नहीं भाते। आजादी का अर्थ है किसी के प्रति जवाबदेही न होना और अपनी शर्तो पर जिंदगी जीना। लेकिन युवा स्वतंत्रता और उच्छृंखलता का अंतर भी खूब समझते हैं और अपनी आजादी को एक अनुशासन में रहते हुए एंजॉय करना चाहते हैं।


कट्रीना है नंबर वन चॉइस

कट्रीना कैफ हर युवा के दिल में बसी हैं। कैट की खूबसूरती और सादगी उन्हें प्रभावित करती है। 45 प्रतिशत ने कहा कि उनकी स्टाइल आइकॅन कट्रीना कैफ हैं। 30 प्रतिशत युवा प्रियंका चोपडा, करीना कपूर, सोनम कपूर, रणबीर कपूर, सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान के फैन हैं। 25 प्रतिशत ने हॉलीवुड कलाकारों को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा। ज्यादातर ने अपने फेसबुक अकाउंट में अपने प्रिय स्टाइल आइकॅन की फोटो लोड की है। लेकिन जब रोल मॉडल्स की बात आती है तो वे माता-पिता को प्राथमिकता देते हैं। 80 प्रतिशत युवा मानते हैं कि माता-पिता उनके रोल मॉडल हैं। 20 प्रतिशत के लिएभाई-बहन, संबंधी, शिक्षक या कोई महापुरुष उनके रोल मॉडल हैं।


सारे नियम तोड दो

यूथ अपने नियम खुद बनाना चाहते हैं। जिंदगी को जीने की उनकी अपनी शर्ते हैं। वे बंधे-बंधाए ढर्रे पर जीना पसंद नहीं करते। लकीर के फकीर नहीं बने रहना चाहते। वे चाहते हैं कि अपने नियम खुद बनाएं। लडकियां भी अब नियम तोडने में पीछे नहीं हैं। हालांकि ऐसा वे आमतौर पर नहीं करतीं, लेकिन उनके मन में इच्छा जरूर रहती है कि कभी वे भी कुछ नियम तोडें।

55 प्रतिशत युवा मानते हैं कि नियम तोडे जाने के लिए ही बने हैं, जबकि 45 प्रतिशत इनका पालन करना चाहते हैं। 55 प्रतिशत ने कभी न कभी कोई नियम जरूर तोडा है।


करियर वही जो मन भाए

करियर को लेकर आज के यूथ की सोच स्पष्ट है। आज भी इंजीनियरिंग, आई.टी.सेक्टर और बी.पी.ओ. उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर हैं, लेकिन वे अपने लिए और भी रास्ते खुले रखना चाहते हैं। इंजीनियरिंग करते हुए एम.बी.ए. करने के बारे में सोचना उन्हें बुरा नहीं लगता। एक्स्ट्रा बेनिफिट उन्हें हर स्तर पर चाहिए। वैसे ज्यादातर युवा रचनात्मक काम करना चाहते हैं। उन्हें काम करने की आजादी चाहिए और हां- बेहतर कमाई वाली जॉब्स ही उन्हें भाती हैं। कुछ साल मेहनत और जिंदगी भर आराम.., यही सोचना है इनका। वे ऐसे करियर चाहते हैं, जिनमें ज्यादा पैसा, अधिक सुरक्षा, काम की गारंटी के साथ भरपूर प‌र्क्स भी मिलें।


जेनरेशन गैप तो रहेगा

युवा मानते हैं पुरानी और नई पीढी में बहुत फर्क है। एक ओर पुरानी पीढी के मूल्य, संस्कृति, रिश्तों में ठहराव, अनुशासन, सहयोग, अनुभव जैसे गुण उन्हें प्रभावित करते हैं, दूसरी ओर कई बार यही गुण उन्हें परेशान भी करते हैं। 80 प्रतिशत युवा मानते हैं कि पुरानी पीढी में अनुभव, प्यार, केयर, रिश्तों में कमिटमेंट और सांस्कृतिक-नैतिक मूल्य उन्हें आकर्षित करते हैं, जबकि 20 प्रतिशत को पुरानी पीढी में अनुशासन, सुरक्षा भावना और परंपराएं भाती हैं। युवा मानते हैं कि यदि पुरानी पीढी खुद को थोडा बदले तो जेनरेशन गैप कम हो सकता है। 70 प्रतिशत मानते हैं कि पुरानी पीढी उन्हें समझना नहीं चाहती और 30 प्रतिशत का कहना है कि पुरानी पीढी के लोग अपने जमाने का गुणगान ज्यादा करते हैं। उनके सकारात्मक और नकारात्मक पहलू के बारे में एक पंक्ति में वे कहना चाहते हैं-

प्लस पॉइंट : एक्सपीरियंस बोलता है।
माइनस पॉइंट : एक्सपीरियंस कुछ ज्यादा ही बोलता है।
Powered by Blogger.