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आखिर जिंदगी का सबसे बड़ा अफ़सोस क्या है

हाल ही में मैं एक post पढ़ रहा था Top 5 Regrets Of The Dying इसमें Bronnie Ware ने कुछ बड़ी ही important बातें share की हैं .
Bronnie पेशे से एक nurse थीं , और उनका काम ऐसे लोगों की देख -भाल करना था जो मौत के बहुत करीब हों . वे बहुत से patients के आखिर के कुछ हफ़्तों में उनके साथ रहीं और इस दौरान हुए experience को उन्होंने एक किताब के रूप में दुिनया के सामने रखा जिसका नाम है , “Top 5 Regrets Of The Dying”. यानी मरने वाले लोगों को किन 5 बातों का सबसे अधिक अफ़सोस था .
और आज इस पोस्ट में मैं आपसे इन 5 में से सबसे बड़े  regret के बारे में बात करना चाहता हूँ .
Bronnie कहती हैं कि मरने से पहले लोगों को बहुत सी बातों का अफ़सोस था पर एक ऐसी बात जिसका अफ़सोस लोगों को सबसे अधिक था वो थी :
“ I wish I’d had the courage to live a life true to myself, not the life others expected of me.
“काश , मेरे अंदर मेरे मन की ज़िन्दगी जीने का साहस होता , न कि ऐसी ज़िन्दगी जैसे की दूसरे मुझसे उम्मीद करते थे.” 
“True to self ” और ” Courage” का क्या मतलब है ?
इसे examples से समझना आसान होगा . Most probably आपने “Swades” movie देखी होगी … उसमे Mohan Bhargava ( Shah Rukh Khan ) NASA , अमरीका में बतौर project manager काम कर रहे होते हैं , वहां उन्हें बचपन में देखभाल करने वाली आया की बहुत याद आती है और एक दिन वो अचानक ही उसे ढूंढने India चले जाते हैं … और वहां जाकर गाँव की जो स्थिति देखते हैं तो फिर NASA छोड़ कर वहीँ बिजली लाने में जुट जाते हैं .
इस movie में Mohan Bhargava ने अपने दिल की आवाज़ सुनी और वही किया। … यही है “true to self” होना , और ऐसा करना आसान नहीं है , एक well settled life, और highly paid job छोड़ कर एक uncertain challenging life के पीछे जाना courage है … साहस है .
ये तो movie हो गयी पर हक़ीक़त में ऐसे हज़ारों examples हैं जहाँ लोगों ने कुछ ऐसे ही काम किये हैं , for instance हम भारत के तत्कालीन PM Narendra Modi का उदाहरण ले सकते हैं … Mr. Modi जब young थे तब उन्हें एक बार सन्यासी बनने की सूझी और वे 2 साल के लिए सबकुछ छोड़ भारत के विभिन्न मंदिरों और मठों में घूमते रहे … ये true to self होना ही तो हुआ … क्योंकि समाज की नज़रों से तो ये पागलपन था पर उन्होंने ये नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे उन्होंने तो वो किया जो उनकी अंतरात्मा ने कहा … और  ऐसा करने के लिए साहस चाहिए होता है , उन्होंने साहस दिखाया … कुछ ऐसा ही स्टीव जॉब्स ने किया था जब वे एक बाबा को ढूंढने इंडिया आ गए थे…देखें तो हमारे आस-पास में भी ऐसे कई examples मिल जाएंगे जहां लोगों ने conventional wisdom को छोड़ते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनी और एक  true to self lifeकी तरफ बढ़ चले .
एक  और  important बात  कहना  चाहूंगा , true to self होने  के  लिए  आप  जो  decisions लेते  हैं  ज़रूरी  नहीं  की  आप  उनको ढोएं  ,अगर  बाद  में  आपको  realize होता  है  की , मैंने  जो decision लिया  उसे  change  करना  चाहिए  पर  फिर  भी  आप  बस  इसलिए  की  वो  decision आपने  ही  लिया  था …family को  oppose कर  के  लिया  था  आप  उसे  ढोते  रहे  तो  ये  गलत  होगा  , ऐसा  करना  एक  बार  फिर  true to self होना  नहीं  होगा  , इसलिए  इस  रास्ते  पर  चलते  हुए  अगर  आपको  अपने  decisions बदलने  पडें तो  झिझकिये  मत  ये  आपकी  life है  इसका  control आप  ही  के  पास  होना  चाहिए …दूसरों  के  हाथों  में  नहीं !
फ्रेंड्स, मैं भी अभी 100% एक true to self life नहीं जी रहा ,मैं अपने टाइम पर पूरा कंट्रोल चाहता हूँ पर अभी भी मैं एक job करता हूँ , जहाँ मेरा major टाइम चला जाता है …अभी भी मैं उस शहर से दूर हूँ जहाँ मैं बसना चाहता हूँ …अभी भी मैं उन ज़रूरतमंदों का हाथ नहीं थाम पा रहा हूँ जिन्हे मैं अपने गले से लगाना चाहता हूँ … पर मैं ऐसा कर पाउँगा इस बात का दृढ विश्वास है मुझे … मैं जानता हूँ की मेरे संघर्ष का एक ही परिणाम हो सकता है … मेरी जीत …और जब तक मेरी जीत नहीं होगी तब तक ये संघर्ष भी खत्म नहीं होगा … मैं चलता रहूँगा … अनवरत अपनी मंज़िल की ओर … मैं आपसे भी पूछना चाहूंगा की क्या आज आप जो ज़िन्दगी जी रहे हैं वो एक सच्ची, एक TRUE TO SELF ज़िन्दगी है …. क्या आप अपने आप से ईमानदार हैं , आज आप जो भी पढाई कर रहे हैं , जो भी नौकरी या business कर रहे हैं क्या ये वही है जिसे आप सचमुच करना चाहते हैं …. maybe हो सकता है अभी आप ऐसा न कर पा रहे हों , पर क्या कम से कम आप उस दिशा में सोच रहे हैं … आगे बढ़ रहे हैं … संघर्ष कर रहे हैं ….
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप society के pressure में … महज उसे दिखाने के लिए अपने लिए एक fake world create कर रहे हैं जहाँ आप बाहर से खुश नज़र आते हैं पर कहीं न कहीं अंदर से dissatisfied रहते हैं …
अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो possible है की मरते वक़्त आपका भी सबसे बड़ा regret यही होगा कि आप एक fake life जीते रहे और अपने true-self को घुट -घुट कर मरने दिया …. आपको अपनी सच्चाई को मरने नहीं देना होगा…. आपको दूसरों के मुताबिक नहीं खुद की सोच से अपने जीवन का निर्माण करना होगा … friends, आप जब तक जियें एक true to self life जिएं ताकि जब आप मरें तो इस ज़िन्दगी पर आपको कोई अफ़सोस नहीं अभिमान हो !!!
All the best :)
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