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फेसबुक की लत

फेसबुक, व्हाट्सऐप , स्मार्टफोन या किसी अन्य सोशल मिडिया की लत, इस विषय पर बहुत कुछ लिखा पढ़ा जा चूका होगा। कईं सेमिनार हो चुके होंगे, ब्रिटेन के किसी होनहार ने कोई रिसर्च पेपर तक प्रदर्शित कर दिया होगा। परन्तु इस लत को जिंदगी जीने की लठ IIN के सिवा किसी ने साबित नहीं किया होगा।

आप में से कितने ही लोग ऐसे होंगे जिन्हे कभी न कभी फेसबुक/स्मार्टफोन की लत लगी होगी या अभी भी होगी ? एक बात बता दू आपको की यह लत किसी भी प्रकार की अन्य लतो की तुलना में जितनी ज्यादा खतरनाक है उतनी ही गुणकारी भी। आपको दारू सिगरेट की लत है तो आप दिन में कितनी बार पीते होंगे ? सिगरेट ४ बार ६ बार , दारू १ बार या २ बार , गुटखा खैनी मुश्किल से दिन में २ बार। 
परन्तु अगर आपको फेसबुक या व्हाट्सऐप की लत लगी हुयी है तो जनाब पूछिये ही मत। दिन में १००-१०० बार आप फेसबुक या व्हाट्अप खोल खोल के देखेंगे बिलकुल वैसे ही जैसे पहले पहले प्यार में इंसान अपनी माशुका या माशूक के पुराने मेसेजेस भी बार बार पढता था। आजकल तो पहला वाला प्यार ही बार बार हो जाता है, यह और बात है की हर बार माशुका बदल जाती है।


परन्तु अगर आप "बी-पॉजिटिव" वाले नजरिये से देखे तो यह लत कईं मायनो में समाज की दशा सुधारने की दिशा में बहुत ही कारगर सिद्ध हो सकती है।कैसे , यह जानने के लिए चलते है रोहित के घर।

 रोहित को जब भी उसके पिताजी डांट लगाते है तो वो चुपचाप उठकर अपने कमरे में जाके अपना लैपटॉप खोलकर बैठ जाता है। तुरंत फेसबुक पर लोगिन करता है और स्टेटस अपडेट करता है "फीलिंग इरिटेटेड", उसके बाद धड़ाधड़ कमेंट्स आने शुरू हो जाते है, लोग बाग़ अपनी सांत्वना से रोहित का मूड फ्रेश कर देते है।
वहीं अगर यह पुराने जमाने का रोहित होता तो या तो घर छोड़कर ही चला जाता या फिर अपने किसी नालायक दोस्त के पास जाकर अपना दुखड़ा सुनाता। बदले में वो दोस्त कुछ न कुछ "पट्टी" पढ़ा ही देता।

एक और उदाहरण लेते है अपने दीपू का, दीपू को उसकी गर्लफ्रेंड ने सिर्फ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि दीपू ने उसे पिछले नौ दीनो में एक भी सरप्राइज नहीं दिया था। दीपू का दिल टूट चूका था, तभी वो घर आकर अपने स्मार्टफोन से फेसबुक पर लोगिन कर स्टेटस डालता है "फीलिंग ब्रोकन " बदले में वहीं ढेरो सांत्वनाएं मिलती है और प्रेम प्रसंग का सिस्टम रिबूट हो जाता है। अगर यहाँ भी पुराने जमाने का दीपू होता तो सीधा "अल्ताफ राजा" या "पंकज उधास" बन कर "मयखाने" की और दौड़ लगाता।


तो देखा आपने किस तरह से फेसबुक की इस लत ने हमारी युवा पीढ़ी को बुरी संगतो से बचा के रखा है। यही नहीं आजकल व्हट्सऐप की नयी लत लगी है अपने दोस्तों को। वो भी बहुत फायदेमंद सिद्ध हो रही है। आपको अकेले बैठे बैठे बोरियत हो रही हो तो तुरंत आपका कोई दोस्त या ग्रुप मेंबर एक धांसू चुटकुला भेज देता है या कोई "फ़िल्मी गाना बताओ" करके पहेली भेज देता है तो आपका समय बड़ी आसानी से बर्बाद व्यतीत हो जाता है। यही नहीं आप पत्नी से पीड़ित है और बुरी तरह से मन व्यथित है तो भी आपके कईं दोस्त आपको "पत्नी पीड़ित स्पेशल" जोक्स भेजते रहेंगे जिन्हे पढ़कर आप हल्का महसूस करेंगे।

किन्तु एक बात सामने आयी है की ज्यादातर पत्नियां अपने पति की इस व्हाट्सएप या फेसबुक की लत से खफा हो जाती है। उन्हें मैं समझाना चाहता हूँ की देखिये आपके पति आपके पास ही बैठे है, अपने दोस्त के साथ बातें कर रहे है वो भी बिना कुछ बोले चाले एक दम "म्यूट" अवस्था में। सोचिये आपका कितना बड़ा फायदा है इसमें , एक तो वो कहीं बाहर जाकर अपना मूह काला मूड फ्रेश नहीं कर रहे और दूसरा उनके कोई दोस्त यार आपके घर आके धमाल नहीं मचा रहे। और इन सबसे बड़ी बात आप अपने पति की गोद में लेटकर बड़े इत्मीनान से "यह रिश्ता क्या कहलाता है" सीरियल का लुत्फ़ ले सकती है।

तो साथियों, देर मत कीजिये जल्द ही IIN में दाखिला लीजिये। और जिंदगी के कृत्रिम असली मज़ो का लुत्फ़ उठाईये।
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