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पांच सूत्र सफलता पाने को

सफलता मात्र असफलता का विरोधाभास नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के मन में दबी हुई इच्छाओं का एक ऐसा मोती है, जिसे हर कोई अपनी हथेली में रखना चाहता है। इसे पाने की प्रबल प्रेरणा व्यक्ति को सिफर से शिखर तक पहुँचा देती है।
असंख्य लोग दिन-प्रतिदिन सफलता प्राप्त करते हैं, पर क्या कारण है कि उन असंख्य लोगों में हमारी गिनती नहीं होती? हम सफलता से इतने दूर क्यों है? इसके लिए मन में विजेता बनने का निश्चय करना जरुरी है। सूरज को जिस तरह से रोशनी देने से कोई रोक नहीं सकता, उसी तरह आपको भी कोई सफल होने से रोक नहीं सकता। कमर कस कर तैयार हो जाएँ। सूरज को उगना ही है, उसी तरह आपको भी सफल होना ही है, फिर यह हिचकिचाहट या संशय क्यों? अभी और इसी वक्त से आपको सफलता का सफर तय करने की तैयारी करनी है और सफर के अंत में सफलता आपके स्वागत में खड़ी है, उसे स्वीकारना भी है। यह कोरी  कल्पना आपके आज को कल के लिए तैयार करती है और बंधी मुट्ठी, जोशीले पैर आपको आग बढ़ाते हैं।
यहाँ सफलता के कुछ ऐसे ही सूत्र दिए जा रहे हैं, जो आपके लिए मील का पत्थर साबित होंगे –
1. बड़े स्वप्न देखें –
शेेखचिल्ली की तरह सोते-सोते सपने देखना बहुत आसान है। किंतु हम यहाँ उन सपनों की बात नहीं कर रहे हैं। यहाँ उन सपनों की बात हो रही है, जिसमें प्रत्येक युवा अपने केरियर को लेकर सपने देखता है। हमारे राष्ट्रपति कलाम साहब कहते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को बड़े सपने देखने चाहिए। जो लोग बड़े सपने नहीं देखते, वो बड़े बन भी नहीं सकते। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्में कलाम को देश के प्रथम व्यक्ति होने का गौरव प्राप्त है, उसके पीछे उनके बड़े सपने हैं, जिनके कारण वो इस मुकाम को हासिल कर पाए।
2. अवसर को पहचानें –
अवसर किसी के द्वार पर बार-बार दस्तक नहीं देता। प्रसिद्ध विचारक स्वेट मॉर्डन ने लिखा है कि अवसर लोगों का द्वार एक बार नहीं, बल्कि बार-बार खटखटाता है, परंतु बहुत कम लोग होते हैं, जो उसकी आवाज सुनकर द्वार खोलते हैं। इसलिए अवसर को देखने की पैनी नजर होनी चाहिए। जिस तरह एक शिकारी अपने शिकार पर बाज नजर रखता है और शिकार मिलते ही ट्रीगर दबाता है, उसी तरह अवसर को झपट लेना चाहिए।
3. समर्पणभाव –
समर्पण को हार की निशानी माना जाता है, परंतु वास्तविकता यह है कि समर्पणभाव से जीत की नींव मजबूत होती है। कोई भी काम करना और समपण भाव से काम करना, यह दोनों ही दो अलग-अलग स्थिति है। समर्पण भाव से काम करने का अर्थ है- आप अपने प्रति पूरी तरह से ईमानदार है, अर्थात् आप अपनी संपूर्ण योग्यता, क्षमता, एकाग्रता के साथ सफलता के लिए प्रयास कर रहे है। इसके लिए आप हाथ में लिए गए काम को पूरी गहराई से जानेंगे, उसके लाभ-हानि को समझने का प्रयास करेंगे और फिर निश्चित रूप से सफल होंगे।
4. खतरे उठाने के प्रयास –
अर्थशास्त्र का एक सामान्य नियम है – लाभ पाने के लिए जोखम उठाएँ। इसका सीधा अर्थ यह है कि आप जितने अधिक खतरे उठाएँगे, आपको उतना अधिक लाभ होगा। किंतु यह खतरे अपनी शक्ति, सुविधा और योग्यता के अनुसार होने चाहिए।
5. विजेता होने की जिद – वैसे तो जिद्दी व्यक्तियों को योग्य नहीं माना जाता, पर यदि ये जिद जीतने के लिए की जाए, तो अवश्य सफलता की ओर ले जाती है। जिद एक ऐसी अमूल्य वस्तु है, जिसके बल पर व्यक्ति जमीन आसमान एक कर के सफलता की बुलंदियों को छू सकता है। जब जीवन में निराशा छा गई हो, तब जिद और वह भी आशा को पाने की जिद सफलता दिलाती ही है।

डा. महेश परिमल
संक्षिप्त परिचय : छत्तीसगढ़ की सौंधी माटी में जन्मे महेश परमार ‘परिमल’ मूलत: एक लेखक हैं। बचपन से ही पढ़ने के शौक ने युवावस्था में लेखक बना दिया। आजीविका के रूप में पत्रकारिता को अपनाने के बाद लेखनकार्य जीवंत हो उठा। एक ऐसा व्यक्तित्व जिसके सपने कभी उसकी पलकों में कैद नहीं हुए, बल्कि पलकों पर तैरते रहे और तैरते-तैरते किनारों को अपनी एक पहचान दे ही दी। आज लेखन की दुनिया का इनका भी एक जाना-पहचाना नाम है।
भाषाविज्ञान में पी-एच.डी. का गौरव प्राप्त। अब तक सम-सामयिक विषयों पर एक हजार से अधिक आलेखों का प्रकाशन। आकाशवाणी के लिए फीचर-लेखन, दूरदर्शन के कई समीक्षात्मक कार्यक्रमों की सहभागिता। पाठच्यपुस्तक लेखन में भाषा विशेषज्ञ के रूप में शामिल। विश्वविद्याल स्तर पर अंशकालीन अध्यापन। अब तक दो किताबों का प्रकाशन। पहली ‘लिखो पाती प्यार भरी’ को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा दुष्यंत कुमार स्मृति पुरस्कार, दूसरी किताब ‘अनदेखा सच’ को पाठकों ने विशेष रूप से सराहा।
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