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ब्लड डोनेशन सम्बन्धी मिथक

रक्त दान, जीवन दान के समान होता है। मगर इस दान के सन्दर्भ में भी बहुत से भ्रम छिपे हुए है। आइयें जानते है ब्लड डोनेशन या रक्त दान सम्बन्धी कौन से मिथक है और असल में वास्तविकता क्या है। 
 
 
मिथक : रक्त दान  करने से शरीर में रक्त की कमी हो सकती है। 
वास्तविकता  : रक्त दान करने पर शरीर से ज्यादा नही बल्कि केवल 350 से 450 एम एल खून ही लिया जाता है जिसे आसानी से शरीर दुबारा बना लेता है। 
 
मिथक : रक्त दान करने से इन्फेक्शन या एच आई वी होने की आशंका रहती है। 
वास्तविकता : गलत। यदि ब्लड डोनेट करते समय सभी हाइजीन के नियमों का और नई सुई का प्रयोग किया जाये तो संक्रमण होने की कोई आशंका ही नही रहेगी। 
 
 
मिथक : शुगर रोगी रक्त दान नहीं कर सकता है। 
वास्तविकता : गलत।  यदि आपको शुगर की बिमारी है मगर आप केवल दवाइयों का सेवन करते है और इंसुलिन के इंजेक्शन नहीं लेते है तो आप भी ब्लड डोनेट कर सकते है। 
 
 
मिथक : यदि कोई शाकाहारी ब्लड डोनेट करे तो उसके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। 
वास्तविकता : ब्लड डोनेट करने में शरीर से जितने भी आयरन की मात्रा निकलती है, उसे आपका शरीर 3 से 4 सप्ताह में फिर से बना लेता है। 
 
 
मिथक : यदि आप दवाइयों का सेवन करते है तो आप ब्लड डोनेट नहीं कर सकते है। 
वास्तविकता : ऐसा जरुरी नहीं है।  इस बात की सही जानकारी आपके डॉक्टर ही दे सकते है। 
 
आपके रक्त दान करने से बहुतों को जीवन मिल सकता है। 
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