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अपनाइए नए सेफ्टी फीचर्स वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड, धोखाधड़ी की नहीं रहेगी चिंता

देश  की अर्थव्यवस्था कैशलेस ट्रांजेक्शन की ओर बढ़ रही है। आने वाले दिनों में ट्रांजेक्शन के लिए आपके प्लास्टिक कार्ड का महत्व और बढ़ने वाला है। ऐसे में बैंक भी आपके डेबिट और क्रेडिट कार्ड को नई तकनीकी के साथ सुरक्षित करने के लिए नए फीचर्स के साथ तैयार कर रहे हैं। यदि आपके कार्ड की एक्सपायरी डेट पूरी होने वाली हो। या फिर आप कोई नया डेबिट या क्रेडिट कार्ड किसी बैंक से ले रहे हों तो कार्ड की सुरक्षा के लिए बैंक से नई तकनीकी युक्त कार्ड्स के बारे में जरूर पूंछे। सुरक्षित ट्रांजेक्शन के लिए इन्हीं कार्ड्स को अपनाएं। आइए जानते हैं कि कौन से बैंक आपके लिए कितना सुरक्षित कार्ड आपको मुहैया करा रहे हैं-

आरबीआई ने कहा ईएमवी चिप वाले कार्ड दे बैंक
फ्रॉड को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों से कहा है कि वे आगामी एक सितंबर से जो भी डेबिट और क्रेडिट कार्ड ग्राहको को दें वह ईमवी चिप युक्त और पिन के साथ हो।
क्या है ईएमवी चिप –
EMV एक ग्लोबल स्टैंडर्ड क्रेडिट और डेबिट पेमेंट कार्ड आधारित चिप प्रणाली है। ईएमवी का अर्थ यूरो पे, मास्टरकार्ड, और वीजा है। यह एक माइक्रोप्रोसेसर चिप है। इसके साथ पिन इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि कार्ड इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति ही कार्ड धारक है।
ईएमवी चिप वाले कार्ड का यह है फायदा
बैंकों ने मैग्नेटिक स्ट्रिप के बजाए ईएमवी चिप का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इस कार्ड के जरिए आपके पिन या डाटा की डुप्लीकेसी या हैकिंग नहीं की जा सकेगी। ईएमवी चिप फ्रॉड को रोकने में मददगार साबित होगा।

सुविधानुसार स्विच ऑफ और ऑन करने वाला नया डेबिट कार्ड
कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने और फ्रॉड को रोकने के लिए निजी क्षेत्र के प्रमुख एक्सिस बैंक ने नया डेबिट कार्ड सिक्योर प्लस लांच किया है। इसमें ग्राहक अपने कार्ड को इस्तेमाल न करने की सूरत में खुद ही स्विच ऑफ और ऑन कर सकेंगे। ग्राहक को एक प्रक्रिया अपनानी होगी। उसके बाद ग्राहक मोबाइल की तरह अपने डेबिट कार्ड को इच्छानुसार स्विच ऑफ या जब मन करे स्विच ऑन कर सकता है। यदि ग्राहक यह चाहेगा कि उसका कार्ड जरूरत के मुताबिक सीमित लेनदेन वाला हो जाए तो वह भी ग्राहक के हाथ में होगा। इससे आप किसी भी तरह की संभावित धोखाधड़ी से बच जाएंगे। एक्सिस बैंक इस कार्ड के साथ पांच लाख रुपए की व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा भी दे रही है।
ऐसे स्विच ऑफ होगा आपका डेबिट कार्ड
इस कार्ड का नाम ‘सिक्योर प्लस’ है, जिसे मोबाइल फोन या इंटरनेट बैंकिंग गेटवे या फोन बैंकिंग एप्लीकेशन के माध्यम से स्विच ऑफ किया जा सकता है। इसके साथ ही ग्राहक अपने लेनदेनों को सीमित भी कर सकते हैं।

एनएफसी तकनीक बनेगी भविष्य
सुरक्षा के लिए बैंक नीयर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) तकनीकी का सहारा ले रहे हैं। कुछ ही समय पहले आईसीआईसीआई बैंक ने देश का पहला कांटेक्ट लेस डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी किया है। इस कार्ड को मशीन में स्वैप या टच कराने की भी जरूरत नहीं होगी। नीयर फील्ड कम्युनिकेशन (एनएफसी) तकनीकी पर आधारित इस कार्ड के जरिए एकदम सुरक्षित ट्रांजेक्शन किया जा सकेगा। हालांकि इसके लिए एक विशिष्ट मशीन की भी जरूरत होगी जो ऐसे कार्ड को रीड कर सके।
प्रयोग के तौर पर अभी बैंक ने मुंबई, हैदराबाद और गुड़गांव में 1200 पीओएस मशीन इंस्टॉल की है। जो इस कार्ड को रीड कर सकती है। बैंक इसे आने वाले समय में और बढ़ाएगा। यानी भविष्य में आपको कार्ड स्वैपिंग से भी छुट्टी मिल जाएगी। इस तरह आपका कार्ड और भी सुरक्षित होगा।

बड़े पासवर्ड होते हैं मजबूत
अक्सर यूजर जिस कम्प्यूटर या लैपटॉप से अपने ऑनलाइन लेन-देन करते हैं उस कम्प्यूटर का पासवर्ड काफी कमजोर रखते हैं। लोगों की नजर में यह काफी मामूली हो सकता है मगर पासवर्ड का साइबर क्राइम में काफी अहम रोल होता है। आमतौर पर यूजर आठ या उससे कम अक्षरों का पासवर्ड रखते हैं जो कि सुरक्षित नहीं होता।
एक सामान्य हैकर के लिए आठ या उससे कम अक्षरों का पासवर्ड ब्रेक कर पाना दस मिनट का खेल होता है। मगर इसके विपरीत अगर दस से बारह या उससे ज्यादा अक्षरों का पासवर्ड रखा जाए तो उसे ब्रेक करना आसान नही होता। ऐसे पासवर्ड को ब्रेक करने में कई महीने या साल लग सकते हैं। इसलिए यूजर्स को ज्यादातर अपने पासवर्ड बड़े रखने चाहिए।

कम्प्यूटर से मिलते हैं क्रेडिट और डेबिट कार्ड नम्बर

आए दिन साइबर क्राइम से जुड़ी वारदातें सुनने को मिलती रहती हैं। अक्सर सुनने को मिलता है कि यूजर के अकाउंट से पैसे निकाल लिए गए तो कभी यूजर के कार्ड से लाखों की शॉपिंग कर ली गई। दरअसल इसके पीछे सबसे मुख्य कारण होता है जिस कम्प्यूटर या लैपटॉप से बैंकिंग अथवा अन्य कार्य किए जाते हैं उसका सुरक्षित नहीं होना।
हैकर यूजर के अकाउंट नम्बर, क्रेडिट या डेबिट कार्ड नम्बर व अन्य जानकारी जानने के लिए उसके कम्प्यूटर अथवा लैपटॉप में ट्रोजन वायरस इंस्टॉल कर सकता है। जिससे वो यूजर के कार्ड नम्बर हासिल कर उनका इस्तेमाल कर सकता है। इससे सुरक्षा के लिए यूजर ट्रोजन इन्फेक्टेड कम्प्यूटर इस्तेमाल ना करें।
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