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क्‍या है मोबाइल पेमेंट, कैसे करता है काम और क्‍यों है आसान?

मोबाइल का यूज अब केवल बात करने और संदेश भेजने के लिए ही नहीं, बल्कि बिलों के भुगतान और खरीदारी के लिए भी किया जा रहा है। जिसके जरिए किए जाने वाले पेमेंट को मोबाइल पेमेंट सर्विस कहते हैं। इसके जरिए मोबाइल धारक तुरंत पैसा कहीं भी भेज सकता है और प्राप्‍त भी कर सकता है। जिस तरह डेबिट और क्रेडिट कार्ड ने खरीदारी का प्रचलन बढ़ाया उसी तरह मोबाइल फोन से भी इसका प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। कई बैंक और टेलिकॉम कंपनियां ऐसी सुविधा मोबाइल फोन पर उपलब्ध करा रही है, ताकि आपको बैंक और एटीएम के चक्‍कर न लगाना पड़े।

देश में जितने लोगों के बैंक अकाउंट हैं उनसे ज्‍यादा लोगों के पास मोबाइल फोन हैं। जबकि इंटरनेट से जुड़ने की वजह से मोबाइल धीरे-धीरे पर्सनल कंप्यूटर की जगह ले रहा है। इन संभावनाओं को देखते हुए ही बैंकों और टेलिकॉम कंपनियों की नजर मोबाइल पेमेंट सर्विस पर है। जिसको देखते हुए मोबाइल सेवा देने वाली कंपनियों के साथ हाथ मिलाकर बैंकों ने आपके मोबाइल फोन को मोबाइल बटुआ यानी एम-वॉलेट में बदलना शुरू कर दिया है।

मोबाइल के जरिए पेमेंट का तरीका
अगर आप मोबाइल से जुड़े हैं तो इंटरनेट के बगैर भी कहीं से लेन देन कर सकते हैं। मोबाइल वॉलेट से आप अपने फोन को रिचार्ज भी कर सकते हैं। जबकि इससे बिलों का पेमेंट किया जा सकता है। दरअसल यह काम प्री-पेड फोन को रिचार्ज करने की तरह है। जिस प्रकार आप बैंक या एटीएम से पैसा निकालकर अपने पर्स में रखते हैं, उसी तरह से मोबाइल वॉलेट में पैसा भरने के लिए आपको वॉलेट सर्विस प्रोवाइडर के पास पैसा जमा करना पड़ता है। जिसका इस्तेमाल मोबाइल सेवाओं के अलावा खरीदारी करने, बिलों के भुगतान करने, रेलवे टिकट बुक कराने और मनी ट्रांसफर करने के लिए किया जा सकता है।
मोबाइल या वॉलेट से पेमेंट करना आसान
दरअसल लोगों को ऑनलाइन शॉपिंग, फोन रिचार्ज, यूटिलिटी पेमेंट, कैब या फूड ऑर्डरिंग जैसे ऑनलाइन सर्विस के लिए मोबाइल या वॉलेट से पेमेंट करना आसान लग रहा है। जबकि इसके इस्तेमाल में आसानी और सेफ्टी फीचर्स के चलते मोबाइल वॉलेट की लोक्रप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके अलावा टैक्सी किराया जैसी रोजमर्रा पेमेंट के लिए लोगों को अब ज्यादा नकद लेकर नहीं चलना पड़ता। मोबाइल रिचार्ज भी अब ज्यादातर लोग इसी तरह से करा रहे हैं।
आरबीआई आंकड़ों में एम वॉलेट ट्रांजेक्‍शन
आरबीआई के आंकड़ों से मोबाइल वॉलेट की लोकप्रियता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि कैसे साल दर साल इसमें इजाफा हुआ है। जिसे आंकड़ों के माध्‍यम से नीचे समझाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसमें इसके जरिए की गई ट्रांजेक्‍शन की संख्‍या और उसका मूल्‍य कितना है उसे दिखाने की कोशिश की गई है जो इस प्रकार है-
क्रम संख्‍या-----वर्ष----एम वॉलेट ट्रांजेक्‍शन वैल्‍यू (करोड़ रुपए)---------ट्रांजेक्‍शन की कुल संख्‍या (करोड़ में)
1. -------2012-13---------------------1,001------------------------------------------3.27
2. -------2013-14---------------------2,747------------------------------------------10.612
3. -------2014-15---------------------8,184------------------------------------------25.5

एम वॉलेट सर्विस की संभावना और दायरा
मोबाइल के जरिए पेमेंट यानी एम वॉलेट के तहत सर्विस और दायरा क्‍या होगा। इसके अलावा प्री-पेड उपकरणों को किसको जारी किया गया है और इसके तहत हम क्‍या कर सकते हैं और कौन सा काम नहीं कर सकते। इसको विस्‍तारपूर्वक नीचे दिया जा रहा है जिसे चार्ट के माध्‍यम से समझा जा सकता है। जो इस प्रकार है-
क्रम संख्‍या
श्रेणी/सर्विस
प्री-पेड पेमेंट उपकरण/-कॉमर्स कंपनी
क्‍या कर सकते हैं
क्‍या नहीं कर सकते
1.
सेमी-क्‍लोज्‍ड लूप ई-वॉलेट
(गैर बैंकों के द्वारा जारी)
पेटीएम, मोबीक्विक, साइट्रस
इस वॉलेट का यूज उन सभी दुकानदारों के साथ किया जा सकता है। जिन्‍होंने इसके जरिए पेमेंट का करार कंपनी से किया है।
यह विशेष रूप से टाई-अप पर काम करता है। पेटीएम वॉलेट का यूज टैक्‍सी हेलिंग एप के जरिए उबर के पेमेंट के लिए किया जा सकता है। जबकि साइट्रस वॉलेट का
मेरू के लिए।
2.
क्‍लोज्‍ड लूप ई-वॉलेट
(गैर बैंकों के द्वारा जारी)
ओला कैब और फिल्‍पकार्ट
कस्‍टमर इस ई-वॉलेट का यूज सिर्फ कंपनी के ऑनलाइन स्‍टोर पर पेमेंट के लिए कर सकता है।
इस ई-वॉलेट मनी का यूज रिफंड के लिए बैंक अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
3.
बैंक
(सामान्‍यत: सेमी- क्‍लोज लूप )
आईसीआईसीआई बैंक का पॉकेट, आरबीएल का पेयूमनी, एचडीएफसी बैंक का चिल्‍लर
इस तरह के ई-वॉलेट बैंक के साथ पार्टनरशिप को बढ़ावा देने और जनउपयोगी बिलों का पेमेंट करने, मोबाइल रिचार्ज करने और चुने हुए दुकानदारों का पेमेंट करने के लिए किया जा सकता है।
प्री-पेड ई-कॉमर्स कंपनियों की तुलना में इसमें डिस्‍काउंट
की पेशकश ज्‍यादा नहीं की जाती है। इसके अलावा कस्‍टमर को कैश वापस नहीं किया जाता।
4.
टेलीकॉम कंपनियां
वोडाफोन एम-पैसा,
एयरटेल मनी, आइडिया मनी
ये सेमी ओपन वॉलेट हैं जिनका काम मोबाइल रिचार्ज और मनी ट्रांसफर करना है।
इस तरह के अकाउंट खोलने की वही प्रक्रिया है जो बैंक अकाउंट खोलने की है।
5.
रुपए भेजने और मनी ट्रांसफर
फिनो, इट्जकैश, ऑक्‍सीजन
इसके जरिए एक जगह से दूसरी जगह फंड का ट्रांसफर किया जाता है जहां पर दोनों पार्टियों और इसे प्राप्‍त करने वालों के पास बैंक अकाउंट ना हो।
इस तरह के मनी को वॉलेट में वापस नहीं किया जा सकता।
6.
सोशल मीडिया पर आधारित मनी ट्रांसफर
(बैंक के द्वारा जारी)
पींगपे/केपे
सोशल मीडिया के संपर्क को इसमें जोड़ दिया जाएगा।
ऑनलाइन शॉपिंग की सुविधा नहीं
7.
मास ट्रांजिट सिस्‍टम ऑपरेटर
आरबीआई ने इसको मंजूरी दे दी है, जिसके तहत मुंबई और दिल्‍ली मेट्रो इसको लांच कर सकते हैं।
जिसके तहत एक प्री-पेड कार्ड टिकट खरीदने और मेट्रों परिसर के अंदर खरीदारी करने के लिए किया जा सकता है।
इसका प्रयोग मेट्रो स्‍टेशन परिसर के बाहर नहीं किया जा सकता है।
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