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जीवन का मूल्य !

हमारा जीवन इश्वर का दिया हुआ एक अमूल्य तोहफा है. हम अपने जीवन में बहुत तरह के लोगों से मिलते है और प्रत्येक आदमी अपनी तरह से हमारी एक पहचान बनाता है. और ग़लतफ़हमी में हम अपने आप को वैसा हीं समझने लगते हैं. आइये पढ़ते हैं एक बहुत ही रोचक और प्रेरणादायक कहानी........

गुरु नानक साहब के पास एक आदमी गया और उसने कहा बताइये गुरुजी, जीवन का मूल्य क्या है? गुरुनानक जी ने उसे एक पत्थर दिया और कहा, जा और इस पत्थर का मूल्य पता करके आ, लेकिन ध्यान रखना पत्थर को बेचना नहीं है.

वह आदमी पत्थर को बाजार में एक संतरे वाले के पास लेकर गया और बोला, इसकी कीमत क्या है? संतरे वाला चमकीले पत्थर को देख कर बोला, 12 संतरे ले जा और इसे मुङो दे जा. वह आदमी संतरे वाले से बोला, गुरु ने कहा है इसे बेचना नहीं है.

अब वह एक सब्जी वाले के पास गया. सब्जी वाले ने उस चमकीले पत्थर को देखा और कहा, एक बोरी आलू ले जा और इस पत्थर को मेरे पास छोड़ जा. उस आदमी ने कहा, मुङो इसे बेचना नहीं है.

आगे एक सोना बेचने वाले सुनार के पास गया उसे पत्थर दिखाया. सुनार बोला 50 लाख रुपये में बेच दे. उसने मना कर दिया, तो सुनार बोला 2 करोड़ रुपये में दे दे. उस आदमी ने सुनार से कहा मेरे गुरु ने इसे बेचने से मना किया है.

आगे हीरे बेचने वाले एक जौहरी के पास गया उसे पत्थर दिखाया. जौहरी ने जब उस बेशकीमती रु बी को देखा, तो पहले उसने रु बी के पास एक लाल कपड़ा बिछाया फिर उस बेशकीमती रु बी की परिक्रमा लगायी. माथा टेका, फिर जौहरी बोला, ‘कहां से लाया है ये बेशकीमती रु बी. सारी कायनात, सारी दुनिया को बेचकर भी इसकी कीमत नहीं लगायी जा सकती. ये तो बेशकीमती है.’

वह आदमी हैरान परेशान होकर सीधे गुरु के पास आया. अपनी आप बीती बतायी और बोला, ‘अब तो बताएं गुरुजी मानवीय जीवन का मूल्य क्या है?

गुरुनानक बोले : तूने पहले पत्थर को संतरे वाले को दिखाया. उसने इसकी कीमत 12 संतरे की बतायी. आगे सब्जी वाले के पास गया. उसने इसकी कीमत एक बोरी आलू बतायी. आगे सुनार ने दो करोड़ रुपये बतायी और जौहरी ने इसे बेशकीमती बताया. अब ऐसे ही तेरा मानवीय मूल्य है, तू बेशक हीरा है, लेकिन सामने वाला तेरा आकलन अपनी औकात, अपनी जानकारी, अपनी हैसियत और मकसद से लगाएगा. घबरा मत, क्योंकि दुनिया में तुङो पहचानने वाले भी मिल जायेंगे.

अतः अपने आप को कभी छोटा महसूस न होने दें. आपमें में भी वो ही शक्तिया इश्वर ने दी है जो की एक सफल आदमी के पास है बस फर्क इतना है कि उसने अपनी शक्तियां पहचान ली है और आपने अभी तक नहीं. अपनी शक्ति को पहचानें और किसी को अपना मूल्य अपने अनुसार न लगाने दें, आप इस धरती  पर सर्वश्रेष्ठ हैं और भगवान ने आपको सिर्फ यहाँ जगह भरने के लिए नहीं भेजा है, उनका साथ में एक महत्वपूर्ण उदेश्य है.
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