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कहानी - संघर्ष !

हमारा जीवन इश्वर के द्वारा दी गई एक अमूल्य उपहार है. इसमें दुःख सुख साथ साथ हैं. हमें एक सर्वश्रेष्ठ जीवन जीने के लिए प्रकृति के कुछ नियम हैं जिन्हें हमें पालन करना है. इन्ही सब नियमो में एक महत्त्वपूर्ण नियम है "संघर्ष". बिना संघर्ष हमारा जीवन सफल नहीं हो सकता है. हो सकता है कि हम बहुत कुछ पा लें पर हमारा जीवन अनुभब से खाली रह जाता है. आइये इसे और बेहतर से समझने के लिए पढ़ते हैं इस प्रेरणादायक कहानी को.......

जीव विज्ञान के टीचर क्लास में बच्चों को पढ़ा रहे थे कि इल्ली (कोष में बंद तितली का छोटा बच्चा) कैसे एक तितली का पूर्ण रूप लेता है. उन्होनें बताया कि 2 घंटे बाद ये इल्ली अपने कोष से बाहर आने के लिए संघर्ष करेगी. और कोई भी उसकी मदद नहीं करेगा उसको खुद ही कोष से बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने देना.

सारे छात्र उत्सुक्ता से इंतजार करने लगे, ठीक 2 घंटे बाद तितली अपने कोष से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी, लेकिन उसे बहुत संघर्ष करना पड़ रहा था. एक छात्र को तितली पर दया आई और उसने अध्यापक की बात को नज़रअंदाज करते हुए उस तितली के बच्चे की मदद की और उसे कोष से बाहर निकाल दिया.

लेकिन अचानक बाहर आते ही तितली ने दम तोड़ दिया.

टीचर जब कक्षा मे वापस आए और घटना के बारे में पता चला तो उन्होनें छात्रों को समझाया की तितली के बच्चे की मौत प्रकृति के नियम तोड़ने की वजह से हुई है. प्रकृति का नियम है की तितली का कोष से निकालने के लिए संघर्ष करना उसके पंखों और शरीर को मजबूत और सुद्ृन्ढ बनाता है. लेकिन छात्र की ग़लती की वजह से तितली मर गयी.|

ठीक उसी तरह ये बात हम पर भी लागू होती है/ बहुत सारे अभिभावक भावनावश अपने बच्चों को संघर्ष करने से बचाते हैं लेकिन वे ये नहीं जानते की ये संघर्ष ही बच्चों को मजबूत बनता है.

तो मित्रों, संघर्ष इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनता है. जो लोग जीवन में संघर्ष नहीं करते उनके हाथ सिर्फ़ विफलता ही लगती है. हमारे जीवन का विकाश ही संघर्ष करने के लिए हुआ है अतः ऐसा न करके अपने आप को ही धोखा दे रहे होते हैं.

अंत में यही कहूँगा कि संघर्ष कीजिये और सर्वोच सफलता प्राप्त कीजिये.
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