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प्रेम ही जीवन है !

एक बार फिर से मै उपस्थित हूँ एक नए लेख के साथ "प्रेम ही जीवन है". प्रेम ही एक ऐसी महान शक्ति है जो प्रत्येक दिशा में जीवन को आगे बढाने में सहायक होती है,बिना प्रेम के किसी के किसी के विचारो में परिवर्तन नहीं लाया जा सकता. विचार तर्क-वितर्क की सृष्टी नहीं है. विश्वास बहुकाल के सत्संग से बनते हैं. अधिक समय की संगती का परिणाम ही प्रेम है. इसलिए विश्वास प्रेम का विषय है.
               
                          यदि हम दुसरो पर विजय प्राप्त करके उनको अपनी विचारधारा में बहाना चाहते हैं, उनके दृष्टिकोण को बदलकर अपनी बात मनवाना चाहते हैं तो प्रेम का सहारा लेना चाहिए. तर्क और बुद्धि हमें आगे नहीं बढ़ा सकते हैं. विश्वास रखिये कि आपको प्रेम और सहानुभूतिपूर्ण सभी बातों को सुनने के लिए दुनियां विवश होगी.
प्रेम हृदय की एक ऐसी अनुभूति है जो हमें जन्म से ही ईश्वर की ओर से उपहार स्वरूप प्राप्त होती है.

प्रेम के द्वारा हम वो काम कर सकते हैं जो ताकत से हम नहीं कर सकते. किन्ही ने सच कहा है कि " ताकत की जरुरत हमें तब होती है जब किसी का कुछ बुरा करना हो, वर्ना सबकुछ पाने के लिए प्रेम ही काफी है"
हमें न सिर्फ प्रेम बाटना चाहिए बल्कि औरो को भी इसकी शक्ति के बारे में बताना चाहिए. 

मानव जीवन में हम अपने कामो में इतने उलझे हुए रहते हैं कि अपने परिवार के साथ समय बिताना तथा उनके साथ प्रेम करना लगभग भूल गए हैं. हम इस आधुनिक युग में भौतिक चीजो से घिरे रहकर अपनी वास्तविकता को भूल गए हैं. हमें ये भूल गए हैं कि इश्वर ने हमें एक सुन्दर परिवार दिया है, एक सुन्दर दोस्तों का समूह दिया है, साथ ही एक खुबसूरत वातावरण दिया है, और हममे इनसब से प्रेम करने की एक भावना मिली है.

हमारे जीवन जीने का मकसद तबतक सफल नहीं होगा जब तक हम ईश्वर की ओर से मिली इस शक्ति बेहतर ढंग से उपयोग न कर लें.

मैं आपलोगों को एक छोटी सी कहानी बताने जा रहा हूँ जो एक जो एक ऐसे आदमी के बारे में है जो बहुत गरीब था. वो हमेशा एक अमीर आदमी बनना चाहता था, वो हमेशा अमीर होने अलग अलग तरीके ढूंढते रहता था. इस चक्कर में अब वो अपने परिवार से लगभग दूर होता जा रहा था क्योंकि हमेशा उसके मन में लालच रहता था. अंततः उसके पास ढेर सारा पैसा था पर उसको खर्च करने बाला को परिवार नहीं था. उसे अब अपने आप से घृणा होने लगी थी, उसको अपना जीवन व्यर्थ लगने लगा था.

इस कहानी से हमारा मतलब ये नहीं है कि हमें अमीर नहीं बनना चाहिए, लेकिन अपना परिवार, दोस्त को खोकर अमीर बनना एक घटिया सोच है जिससे हम लोगो को बहुत दूर रहना चाहिए. 

हमारी जिन्दगी में पैसो का महत्त्व सिर्फ उतना ही है जितना की एक गाड़ी में पेट्रोल की. प्रेम हमारे जीवन का एक अमूल्य धन है, इसे जितना बांटा जाये ये उतना बढेगा.

प्रेम करने का सबसे बढ़िया तरीका ये है कि "अपने आप से अधिक प्यार करें" जब आप अपने आप को प्यार करते हैं तो आपको इसकी शक्ति का सही अनुभव होता है. और जितना अधिक प्यार आप अपने आप को करते हैं उतना ही आप औरो के साथ बाँटते हैं.

हमारा शरीर एक मशीन है. जिस तरह एक मशीन को तेल और इंधन की जरुरत होती है चलने के लिए, और साथ हमें एक सही इंधन का इस्तमाल करना पड़ता है ताकि मशीन ख़राब न हो. उसी तरह आपने कभी सोचा है कि हमारे शरीर को भी एक इंधन(प्रेम) की जरुरत होती है.

अपने आप से प्यार करने के लिए आत्मविश्वास की जरुरत होती है !

ज्यादातर लोग वैसी जिन्दगी जीने में असफल हो जाते हैं जैसी वो जीना चाहते हैं. और इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि वो लोग अपने आप में विश्वास नहीं करते हैं. अपने आप में विश्वास करने का मतलब ये है कि आप वही कर रहे जो आपको दिल चाहता है. अक्सर ये देखा जाता है कि जब किसी बड़े काम को करने के लिए तैयार होते हैं तो लोग आपको गिराने की कोशिश करने लगते हैं. और इस दवाब के कारण हम में से कुछ लोग अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते हैं और बाद में हार मान लेते हैं. कुछ लोग जो अपने आप में विश्वास कर आगे बढ़ते रहते हैं सफल हो जाते हैं, और वही लोग आपकी सफलता का साक्षी बनते हैं जो आपको असफल होते देखना चाहते थे.

कुछ लोग ये सोचते हैं की जब तक सभी लोग उनके विचार से सहमत नहीं होंगे वो गलत हैं, जबकि ये असत्य है.

हारिये न हिम्मत 

मन में सभी के लिए सदभावनाएँ रखना, संयमपूर्ण सच्चरित्रता के साथ समय व्यतित करना, दुसरो की भलाई बन सके उसके लिए प्रयत्नशील रहना, वाणी को केवल सत्यप्रयोजनो के लिए ही बोलना, नयायपूर्ण कमाई पर ही गुजारा करना, भगवन का स्मरण करते रहना, अपने कर्तव्य पर आरूढ़ रहना, अनुकूल- प्रतिकूल परिस्थितियों में विचलित न होना- यही नियम है जिनका पालन करने से जीवन सफल बन जाता है.

जब तक हम में अहंकार की भावना रहेगी, तब तक त्याग की भावना का उदय होना कठिन है. अहंकार से उतना ही सावधान रहिये जितना एक पागल कुत्ते से. 

जब मन में पुरानीं दुःखद स्मृतियाँ सजग हो तो उन्हें भूला देने में ही श्रेष्टता है, अप्रिय बातो को भुलाना उतना ही आवश्यक है जितना अच्छी बात का स्मरण करना.
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