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सलीम और अनारकली की प्रेम कहानी Salim aur Anarkali ki prem kahani

मुगल सम्राट अकबर के चहेते और बाबा फरीद के आशीर्वाद से जन्मे बेटे सलीम ने अनारकली से प्रेम किया। अनारकली एक मूर्तिकार की बेटी थी और बेहद सुंदर थी। सलीम और अनारकली एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे. यह प्यार कब और किस कदर परवान चढ़ता गया यह उन दोनों में से किसी को भी समझ नहीं आया.
 

अकबर को यह बात भी खटकती थी कि अगर सलीम ने मामूली सी कनीज अनारकली से निकाह कर लिया तो वह मल्लिका-ए-हिंदोस्तां बन जाएगी जो मुगल सल्तनत के लिए काफी शर्मसार कर देने वाला होगा इसलिए वे इस प्रेम के खिलाफ थे।  

सलीम को कई बार समझाया गया, धमकाया गया, डराया गया कि वह प्यार के चक्कर में ना पड़े लेकिन सलीम पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ बल्कि अनारकली के प्रेम में पागल शाहजादा सलीम ने अपने पिता के खिलाफ बगावत तक कर दी।
पिता के विरुद्ध इस जंग में सलीम को शिकस्त का सामना करना पड़ा. अकबर ने यह शर्त रखी थी कि या तो सलीम अनारकली को उन्हें सौंप दे या फिर खुद मौत को गले लगा ले. प्यार करने वाले मौत से नहीं डरते इसीलिए सलीम ने अनारकली से दूर होने के बजाय मौत के मुंह में जाना बेहतर समझा. लेकिन आखिरी समय में अनारकली ने आकर अपने प्रेमी शहजादे सलीम की जान बचा ली और खुद को बादशाह अकबर के हवाले कर दिया. 
कहा जाता है कि जब अनारकली ने उनके सामने समर्पण कर दिया तो दरियादिल माने जाने वाले मुगल सम्राट ने अनारकली को जिंदा दीवार में चिनवा दिया। मुगले-आजम फिल्म ने इस प्रेम कथा को अमर कर दिया।
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