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Bahaar Shayari mix collection बहार पर शायरी संग्रह

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प्यार में एक ही मौसम है बहारों का मौसम
लोग मौसम की तरह फिर कैसे बदल जाते हैं
~Faraz
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फिर उसके बाद वही बासी मंजरों के जुलूस,
बहार चंद ही लम्हे बहार रहती है।
~राहत_इंदौरी
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जो तुम मुस्कुरा दो बहारें हँसे, सितारों की उजली कतारें हँसे
जो तुम मुस्कुरा दो नज़ारें हँसे, जवां धड़कनों के इशारे हँसे
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वो गुलबदन कभी निकला जो सैर ए सहरा को
तो अपने साथ हवा ए बहार कर लेगा।
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दरीचे जहन के मै बन्द कर नहीं सकता
दिमाग अपना मुझे पुर बहार करना है।
*** Bahaar Shayari in Hindi
तुम ने हम जैसे मुसाफ़िर भी न देखे होंगे
जो बहारों से चले और ख़िज़ाँ तक पहुँचे
~इक़बाल अज़ीम
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तुम कहो तो   .. बहार बनकर
सब मौसमों को मात देदूं। 👌
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और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे
कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे
~गोपालदास नीरज
*** Bahaar Shayari in Hindi
खार भी ज़ीस्त-ए-गुलिस्ताँ हैं,
फूल ही हाँसिल-ए-बहार नहीं !! Bi
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कोई एसी बजमे बहार हो जहाँ मैं यकीं दिला सकूं
कि तेरा नाम है फसले गुल कि तुझी से हैं ये करामतें
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जला के दाग़-ए-मुहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग में ख़िज़ां की तरह
~दाग़
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उग रहा है दरो दीवार में सबजा गालिब
हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है
~galib
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हमीं से रंग-ए-गुलिस्ताँ हमीं से रंग-ए-बहार
हमीं को नज़्म-ए-गुलिस्ताँ पे इख़्तियार नहीं ~साहिर
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शिद्दत से बहारों के इंतेज़ार में सब हैं
पर फूल मोहब्बत के तो खिलने नहीं देते
*** Bahaar Shayari in Hindi
उन की उल्फ़त का यकीं हो उन के आने की उम्मीद
हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इंतज़ार
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मुझे उस जुनूँ की है जुस्तुजू जो चमन को बख़्श दे रंग ओ बू
जो नवेद-ए-फ़स्ल-ए-बहार हो मुझे उस नज़र की तलाश है
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आमद से पहले तेरी सजाते कहाँ से फूल,
मौसम बहार का तो तेरे साथ आया है !!
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उन की उल्फ़त का यकीं हो उन के आने की उम्मीद
हों ये दोनों सूरतें तब है बहार-ए-इंतज़ार
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अपना बर्बाद आशियाँ देखते हैं तो याद आता है,
बहारें भी उजाड़ देती हैं तिनकों से बने घरौंदों को।
~पाकीज़ा
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ढाएगा सौ क्यामतें , तौबा की ख़ैर हो
दौर-ए-बहार में ये उमड़ना सहाब का
*** Bahaar Shayari in Hindi
उरूज पर है चमन में बहार का मौसम
सफ़र शुरू ख़िज़ाँ का यहाँ से होता है
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यूँ ही शायद दिल-ए-वीराँ में बहार आ जाए,
ज़ख़्म जितने मिलें सीने पे सजाते चलिए !!
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इश्क़ में दिल के इलाक़े से गुजरती है बहार,
दर्द अहसास तक आए तो नमी तक पहुँचे
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जब हम रुकें तो साथ रुके शम-ए-बेकसी,
जब तुम रुको बहार रुकेचाँदनी रुके !!
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काँटों को मत निकाल चमन से ओ बाग़बाँ,
ये भी गुलों के साथ पले हैं बहार में !!

*** Bahaar Shayari in Hindi
मौसम-ए-बहार है अम्बरीं ख़ुमार है
किस का इंतिज़ार है गेसुओं को खोलिए !! -अदम
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फिर देख उसका रंग निखरता है किस तरह,
दोशीजए- खिजां को खिताब-ए-बहार दे !! -अदम
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कांटा समझ के मुझ से न दामन बचाइए,
गुजरी हुई बहार की इक यादगार हूँ !!
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न खिजाँ में है कोई तीरगी, न बहार में कोई रौशनी,
ये नजर-नजर के चराग है, कहीं जल गए,कहीं बुझ गए !!
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नाम भी लेना है जिस का इक जहान-ए-रंग-ओ-बू
दोस्तो उस नौ-बहार-ए-नाज़ की बातें करो !!
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ना गुल खिले हैं, ना उन से मिले, ना मय पी है,
अजीब रंग में अबके बहार गुज़री है।
~faiz
*** Bahaar Shayari in Hindi
लुत्फ़ जो उस के इंतज़ार में है
वो कहाँ मौसम-ए-बहार में है !!
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जो देख लेगा हर बशर् उसको खुद में ही कहीं,
तो मज़हबी इमारतों के बहार फ़कीर कोई होगा नहीं।
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बे मौसम बरसात से अंदाज़ा लगता हूँ मैं,
फिर किसी मासूम का दिल टुटा है मौसम-ए-बहार में।
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उल्फ़त के मारों से ना पूछों आलम इंतज़ार का
पतझड़ सी है ज़िन्दगी, ख्याल है बहार का।
*** Bahaar Shayari in Hindi
आज है वो बहार का मौसम,
फूल तोड़ूँ तो हाथ जाम आए !!
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इक नौ-बहार-ए-नाज़ को ताके है फिर निगाह,
चेहरा फुरोग-ए-मय से गुलिस्तां किये हुए !!
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खुशबू ग़ुंचे तलाश करती है
बीते रिश्ते तलाश करती है
अपने माज़ी की जुस्तज़ू में बहार
पीले पत्ते तलाश करती है !! -~Gulzar
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अपने लिए भी मौसमे गुल है बहार है,
जब से सुना है उनको मेरा इंतज़ार है 1/2- ~रहबर
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देख जिंदा से परे रंगे चमन जोशे बहार
रकस करना है तो पावं की जंजीर न देख!
*** Bahaar Shayari in Hindi
लेके अपनी-अपनी किस्मत आए थे गुलशन में गुल
कुछ बहारों मे खिले और कुछ ख़िज़ाँ में खो गए
~राजेश रेड्डी
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मौसम-ए-गुल में तो आ जाती है काँटों पे बहार
बात तो जब है ख़िजाँ में गुल-ए-तर पैदा कर
~फ़ना निज़ामी
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देख जा आ के महक़ते हुए ज़ख्मों की बहार
मैंने अब तक तेरे गुलशन को सजा रक्खा है.!!
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ये खिजां की ज़र्द सी शाल में जी उदास पेड़ के पास है
ये तुम्हारे घर की बहार है इसे आंसुओ से हरा करो
*** Bahaar Shayari in Hindi
पलकों से आँसुओं की क़तारों को पोंछ लो
पतझड़ की बात ठीक नहीं है बहार में.!!
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कौन से नाम से ताबीर करूँ इस रूत को।।
फूल मुरझाएं हैं ज़ख्मों पे बहार आई है..!!
*** Bahaar Shayari in Hindi
आ कहीं मिलते हैं हम ताक़ि बहारें आ जाएँ।।
इससे पहले कि ता’अल्लुक़ में दरारें आ जाएँ..!!
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