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Chand Shayari mix collection चाँद पर शायरी संग्रह

Chand Shayari
ना चाँद चाहिए ना फलक चाहिए
मुझे बस तेरी की एक झलक चाहिए
***
आज भीगी हें पलके तुम्हारी याद में
आकाश भी सिमट गया अपने आप में
औंस की बूँद ऐसे गिरी ज़मीन पर
मानो चाँद भी रोया हो तेरी की याद मे
***
है चाँद सितारों में चमक तेरे प्यार की
हर फूल से आती है महक तेरे प्यार की
*** Chand Shayari
एक अदा आपकी दिल चुराने की
एक अदा आपकी दिल में बस जाने की
चेहरा आपका चाँद और जिद हमारी चाँदको पाने की
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तस्वीर बना कर तेरी आस्मां पे टांग आया हूँ ,
और लोग पूछते हैं आज चाँद इतना बेदाग़ कैसे है
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ना जाने किस रैन बसेरो की तलाश है इस चाँद को…..।।
रात भर बिना कम्बल भटकता रहता है इन सर्द रातो में….।।
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हमने क़सम खायी है चाँद को चाँद रहने देंगे ..
चाँद में अब तुम को ना ढूँढा करेंगे ..
**** Chand Shayari
ख्वाबो की बातें वो जाने जिनका नींद से रिश्ता हो,
मैं तो रात गुजारती हुँ चाँद को देखने में…
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चाँद तारो में नज़र आये चेहरा आपका
जब से मेरे दिल पे हुआ है पहरा आपका
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ये दिन हैं जब.. चाँद को देखे.. मुद्दत बीती जाती है,
वो दिन थे जब चाँद हमारी छत पे आया करता था.
*** Chand Shayari
रात में एक टूटता तारा देखा बिलकुल मेरे जैसा था…
चाँद को कोई फर्क नहीं पड़ा बिलकुल तेरे जैसा था !
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एक खोया खोया चाँद हे जो हे खफा खफा…
एक टुटा टुटा ख्वाब हे जो हे तुझसे हे जुड़ा…
एक आधी आधी आस हे जो अधूरी रह गयी…
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पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,
तन्हा तो चाँद भी सितारो के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती
*** Chand Shayari
वैसे तो कई दोस्त है हमारे जैसे आसमान में है कई तारे
पर आप दोस्ती के आसमान के वो चाँद है जिसके सामने फीके पड़ते हैं सारे सितारे.
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वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा सो गया था तो क्या हुआ,
अभी मैं ने देखा है चाँद भी किसी शाख़-ए-गुल पे झुका हुआ !
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तुम सुबह का चाँद बन जाओ, मैं सांझ का सूरज हो जाऊँ!
मिलें हम-तुम यूँ भी कभी, तुम मैं हो जाओ…मैं तुम हो जाऊँ…
*** Chand Shayari
नजर में आपकी नज़ारे रहेंगे; पलकों पर चाँद सितारे रहेंगे;
बदल जाये तो बदले ये ज़माना; हम तो हमेशा आपके दीवाने रहेंगे
***
चाँद तो अपनी चाँदनी को ही निहारता है
उसे कहाँ खबर कोई चकोर प्यासा रह जाता है
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इतने घने बादल के पीछे,
कितना तन्हा होगा चाँद!
***
तू चाँद और मैं सितारा होता, आसमान में एक आशियाना हमारा होता,
लोग तुम्हे दूर से देखते,नज़दीक़ से देखने का, हक़ बस हमारा होता..!!
*** Chand Shayari
जब कभी बादलों में घिरता है
चाँद लगता है आदमी की तरह
***
रात भर तेरी तारीफ़ करता रहा चाँद से
चाँद इतना जला …….. कि सूरज हो गया
चाँद के साथ कई दर्द पुराने निकले
कितने ग़म थे जो तेरे ग़म के बहाने निकले
*** Chand Shayari
कहकशां, चाँद, सितारें तेरे चूमेंगे कदम
तेरे रस्ते की मैं एक धूल हूँ, उड़ जाऊँगा
*** Chand Shayari
बेसबब मुस्कुरा रहा है चाँद
कोई साजिश छुपा रहा है चाँद
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चलो चाँद का किरदार अपना लें हम दोस्तों…..
दाग अपने पास रखें और रौशनी बाँट दें…
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दिन में चैन नहीं ना होश है रात में
खो गया है चाँद भी देखो बादल के आगोश में
*** Chand Shayari
ये दिल न जाने क्या कर बैठा, मुझसे बिना पूछे ही फैसला कर बैठा,
इस ज़मीन पर टूटा सितारा भी नहीं गिरता, और ये पागल चाँद से मोहब्बत कर बैठा..!!
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जिन आँखों में काजल बन कर तैरी काली रात
उन आँखों में आंसू का इक कतरा होगा चाँद।
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नजर में आपकी नज़ारे रहेंगे; पलकों पर चाँद सितारे रहेंगे;
बदल जाये तो बदले ये ज़माना; हम तो हमेशा आपके दीवाने रहेंगे
चाँद होता न आसमानों पे अगर,
हम किसे आप सा हसीं कहते
*** Chand Shayari
रातों में टूटी छतों से टपकता है चाँद…
बारिशों सी हरकतें भी करता है चाँद
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चाँद आहें भरेगा फूल दिल थाम लेंगे !
हुस्न की बात चली तो सब तेरा नाम लेंगे !!
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बज़्म ऐ ख़याल में तेरे हुस्न की शमा जल गई …
दर्द का चाँद बुझ गया, हिज्र की रात ढल गई
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ओ, मेरी बाहोँ मे शर्माते लजाते ऐसे तुम आए,
कि जैसे बाद्लों मे चाँद धीरे धिरे आ जाए ।
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तुम आ गये हो तो फिर चाँदनी सी बातें हों ,
ज़मीं पे चाँद कहाँ रोज़ रोज़ उतरता है .
*** Chand Shayari
चाँद मत मांग मेरे चाँद जमीं पर रहकर,
खुद को पहचान मेरी जान खुदी में रहकर.
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हर रास्ता एक सफ़र चाहता है, हर मुसाफिर एक हमसफ़र चाहता है,
जैसे चाहती है चांदनी चाँद को, कोई है जो तुमको इस कदर चाहता है,
ज़ख़्म दिल के गहरे है, आज वो मिले मुझको दर्द जिसको रास है ,
ऐसा लगता है जैसे, चाँद फिर उदास है,
*** Chand Shayari
बुझ गये ग़म की हवा से, प्यार के जलते चराग,
बेवफ़ाई चाँद ने की, पड़ गया इसमें भी दाग
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आंसुओं से धुली ख़ुशी की तरह // रिश्ते होते हैं शायरी की तरह ..
जब कभी बादलों में घिरता है // चाँद लगता है आदमी की तरह
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चाँद भी झांकता हैं पर्दों से…. मेरी तन्हाई का चर्चा … अब आसमानों में हैं ..
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आप कुछ यूँ मेरे आइना-ए-दिल में आए // जिस तरह चाँद उतर आया हो पैमाने में
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चाँद खिड़की से झाकेगा आदतन, चांदनी फिरसे दिल जलाएगी.
रात तनहा सहर तक जाएगी.
*** Chand Shayari
सारी रात गुजारी हमने इसी इन्तजार में की
अब तो चाँद निकलेगा आधी रात में
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ना चाँद निकला ,ना तुमने दस्तक दी
कितनी बोझिल है आज की ये शाम
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तनख्वाह वाले रोज की रौनक/ ताम्बई सिक्के जैसा चाँद
दिन-भर के भूखे-प्यासे को / रोटी जैसा दिखता चाँद
*** Chand Shayari
हासिले ज़िन्दगी है एक वो रात, चाँद बाँहों में जब पिघल जाए,
उनकी महफ़िल से हम उठे तो ज़रूर, उठ के महफ़िल से आ नहीं पाए| ~कैफ़ी आज़मी
*** Chand Shayari
सितारों जैसी ये आँखें ये चाँद सा चेहरा //
तुम्हारा सिलसिला कुछ आसमाँ से मिलता है….
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जो जागते है रातभर, तुम उनका सवेरा क्या जानो..
तुम चाँद हो पूनम का, क्या होता है अँधेरा क्या जानो….!!
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हमारे हाथों में इक शक्ल चाँद जैसी थी /
तुम्हे ये कैसे बतायें वो रात कैसी थी
*** Chand Shayari
वो दूर दूर सही हमेँ है उसकी जुस्तज़ू,
चाँद का अपना ग़ुरूर और हमारी अपनी ज़िद..
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