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Judai Shayari mix collection जुदाई पर शायरी संग्रह

गज़ल में गीत में दोहे में और रुबाई में,
कहां कहां नही ढूंढा तुझे जुदाई में ।।
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क़हर है तेरी जुदाई
पर अपना दिल भी अब पत्थर हो चला है..
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ना मेरी नीयत बुरी थी, ना उसमे कोई बुराई थी
सब मुक़द्दर का खेल था बस किस्मत में जुदाई थी
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मिलन मुमकिन ही नहीं है तो ना कर जुदाई का ग़म.. ज़िंदगी जी ले ‘यार’.. दूर से ही सही, दोस्ती का ये बंधन यादों से ही निभा लेंगे ‘तुम हम’
*** Judai Hindi Shayari
उसको चाहा पर इज़हार करना नहीं आया;
कट गई उम्र हमें प्यार करना नहीं आया;
उसने कुछ माँगा भी तो मांगी जुदाई;
और हमें इंकार करना नहीं आया।
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जिंदगी में मोहब्बत की जुदाई होती है
कभी कभी प्यार में बेवफाई होती है
हमारी तरफ हाथ बढ़ा के तो देखो
दोस्ती में कितनी सच्चाई होती है
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काश यह जालिम जुदाई न होती!
ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती!
न हम उनसे मिलते न प्यार होता!
ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती..!
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मोहब्बत रब से हो तो सुकून देती हैं ..
न खतरा हो जुदाई का न डर हो बेवफाई का
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दिल लेकर मेरा अब जान मांगते है।
कैसा संगदिल है सनम मेरा, प्यार सीखा कर वो जुदाई मांगते है।
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जुदाई हल नही है मसलों का..
तुम समझते क्यूँ नही बात मेरी..
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किस्मत पर एतबार किसको है
मिल जाये खुशी का इंकार किसको है कुछ मजबूरियां है
मेरे दोस्त वरना जुदाई से प्यार किसको है |
*** Judai Hindi Shayari
लाएँगे कहाँ से हम, जुदाई का हौसला ,
क्यों इस क़दर मेरे करीब आ रहें हैं आप …
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तेरी चाहत में , तेरी मुहब्बत में ,तेरी जुदाई में …
कोई रोज़ टूटता है पर आवाज नहीं करता…!
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हर मुलाकात पर वक्तका तकाज़ा हुआ
हर याद पे दिल का दर्द ताजा हुआ
सुनी थी सिर्फ हमने गज़लों मे जुदाई की बातें
अब खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ
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उन्हें अपनी मोहब्बत पे हे गुरुर तो हमे भी तो अपनी मोहब्बत पे हे नाज
जुदाई में भी कभी बदलेगा नही हमारी चाहत का अंदाज
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अब अगर मेल नही है तो जुदाई भी नही,
बात तोड़ी भी नही तुमने बनाई भी नही
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इक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है
जिन को न सह सके ये दिल,ऐसे तो गम नहीं मिले
*** Judai Hindi Shayari
“अंगड़ाई पे अँगड़ाई लेती है रात जुदाई की..
तुम क्या जानो,तुम क्या समझो. बात मेरी तन्हाई की”
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कोई वादा नहीं फिर भी तेरा इंतज़ार है,
जुदाई के बाद भी तुम से प्यार है!
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ज़िंदगी मे किसी से जुदाई का ज़िक्र मत करना…
इस दोस्त से कभी रुसवाई मत करना……
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.हर मुलाकात का .. अंजाम , जुदाई .. क्यों है –
अब तो हर वक्त .. यही बात , सताती है .. हमें
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तेरी हर अदा मोहब्बत सी लगती है
एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है
पहले नही सोचा था अब सोचने लगे है
हम जिंदगी के हर लम्हों में तेरी ज़रूरत सी  लगती है
*** Judai Hindi Shayari
हम आशिक जुदाई के गिरने भी नहीँ देते
बेचैन सी पलकोँ पर मोती से पीरोते हैँ
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तेरी तस्वीर को सीने से लगा लेती हूँ..
इस तरह जुदाई का गम मटा लेती हूँ..!
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दोस्तो की जुदाई का गम ना करना,
दुर रहो तो भी दोस्ती कम ना करना,
अगर मिले जिँन्दगी के किसी मोड पर हम,
तो हमे देख कर अपनी आँखे बन्द ना करना।
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तू क्या जाने क्या है तन्हाई„
इस टूटे दिल से पूछ क्या है जुदाई
बेवफाई का इल्ज़ाम न दे ज़ालिम„
इस वक़्त से पूछ किस वक़्त तेरी याद ना आई…!!!
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जिंदगी के रूप में दो घूंट मिले, इक तेरे इश्क का पी चुके हैं..दुसरा तेरी जुदाई का पी रहे हैं…।।
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प्यार करना हमें भी पसंद है पर जुदाई पसंद नहीं।
जुदाई तो सह भी लेता पर बेवफाई पसंद नहीं।
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जुदाई की ये गर्म रातें अब हमें नहीं सुहाती
कभी यूं भी हो कि सर्द रात हो और हम फिर करीब हो!
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हम ने माँगा था साथ उनका,वो जुदाई का गम दे गए,
हम यादो के सहारे जी लेते,वो भुल जाने की कसम दे गए!
*** Judai Hindi Shayari
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ..
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मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमे;
छोड़ गया वो ये सोच कर की हम जुदाई मे भी खुश हैं ….
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मुझसे अलविदा कहते हुए, मैंने जब उससे पूछा , के कोई निशानी दे दो…!! • • वो मुस्कुराते हुए बोली …, जुदाई ही काफी है … !!
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तेरा तो है हिसाब बरसों का मैं तो लम्हों में रोज़ जीता हूँ
हिज्र में है ये ज़िन्दगी गुज़री ग़म जुदाई का रोज़ पीता.
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तेरी जुदाई का शिकवा करूँ भी तो किससे करूँ।
यहाँ तो हर कोई अब भी मुझे तेरा समझता हैं।
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कितनी सुधर गई है जुदाई में जिंदगी
वो बेवफाई करके मुझ पर अहसान कर गया..!!
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जिंदगी मोहताज नहीं मंज़िलों की वक्त हर मंजिल दिखा देता है;
मरता नहीं कोई किसी की जुदाई में वक्त सबको जीना सिखा देता है।
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तेरे ना होने से जिंदगी में बस इतनी सी कमी रहती है , •
मैं चाहे लाख मुस्कुराऊ इन आँखों में नमी ही रहती हैं..!
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ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में…
लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में…
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हर कदम पे आपका एहसास चाहिए,
मुझे आपका साथ अपने पास चाहिए,
रब भी रो पड़े हमारी जुदाई से,
ऐसा एक रिश्ता ख़ास चाहिए
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जुदा होकर भी जी रहे हैं एक मुद्दत से ,
कभी दोनों ही कहते थे जुदाई मार डालेगी !!!
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बिछडते बिछडते पलट कर उसने सौ बार देखा,
जुदाई की सारी रस्में निभाती गई वो।।
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युँ तो दुनियाँ का हर गम सहा हँसते हँसते,
न जाने क्यों तेरी जुदाई बर्दास्त नहीं होती।
*** Judai Hindi Shayari
लम्हे जुदाई को बेकरार करते हैं,
हालत मेरे मुझे लाचार करते हैं,
आँखे मेरी पढ़ लो कभी,
हम खुद कैसे कहे की आपसे प्यार करते हैं.
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अकेला सा महसूस करो जब तन्हाई में
याद हमारी जब आये तुम्हें जुदाई मे
महसूस करना तुम्हारे ही पास हू मैं
जब चाहे देख लेना मुझे अपनी परछाई में।
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