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Manane ki Shayari mix collection रुठने-मनाने पर शायरी संग्रह

इस कदर हम यार को मनाने निकले उसकी चाहत के हम दिवाने निकले.. जब भी उसे दिल का हाल बताना चाहा उसके होठों से वक़्त न होने के बहाने निकले..
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नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की
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उससे, खफ़ा होकर भी देखेंगे, एक दिन.. कि, उसके मनाने का अंदाज़ कैसा है..!
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मोहब्बत आजमानी हो तो बस इतना ही काफी है, जरा सा रूठ कर देखो मनाने कौन आता है…
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रूठे हुये हो क्यों में मनाने को हु तैयार कीमत बता दो मान जाने की में जिन्दगी लुटाने को हु तैयार
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मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ तेरे बहाने से हैं…. आधी तुझे सताने से हैं आधी तुझे मनाने से हैं…
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वक्त कम है साथ बिताने के लिए इसको ना गंवाना रूठने मनाने के लिए मेरे मेहबूब प्यार कर लिया हमने आपसे बस थोड़ा साथ देना इसको निभाने के लिए
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वो रूठे तो सही हम मनाने का वादा करते है, दिल तोडना है मेरा तो बेशक तोड़ दे वो इस दिल के बिना भी हम उनको चाहने का वादा करते है
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खत्म कर दिया किस्सा, अब रुठने मनाने का.. सुना है वो शख्स हैरान है, मेरे इस रवैये से..
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यूँ रहा रुठने-मनाने का सिलसिला तेरी बेरुखी भी अब वफ़ा लगती है !!
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शहर में वो मजा नही है क्योकि तेरी रुठने मनाने की सज़ा नही है
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यूँ तो….. प्यार की हर अदा निराली हैं पर रुठने मनाने की अदा सबसे आली हैं
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रुठने मनाने के फलसफे से तंग आ गया हूँ, ऐसा कर ए मोहब्बत, अब तू मेरा हिसाब कर दे..!!
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जिंदगी जीने के लिये वक्त हैं बहोत ही कम और तुम्हें रुठने मनाने का खेल पसंद हैं
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ये रुठने मनाने के सिलसिले बड़े ही प्यारे होतेहै तुमसे मिलने परही ये बात जानी हमने
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“ग़र कटती हें उम्र तुम्हे मनाने मेँ,तो कट जाने दो, वैसे भी बिन तुम्हारे जिंन्दगी भी कंहा जिंदगी हें।।”
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तुम रूठो तो तुम्हे मनाने आ जाएंगे कई हम रूठे भी तो बताओ किस के भरोसे…..
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तुम हंसती हो मुझे हसाने के लिए,तुम रोती हो मुझे रुलाने के लिए। एक बार तो रुठ के देखो,मर जाएंगे तुम्हे मनाने के लिए।।
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सोच रखी है बहुत सी बातें तुम्हे सुनाने के लिए….!!! लेकिन तुम हो के आते ही नही हमे मनाने के लिए….!!!
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कितनी बातें, जो आती आधी रात कहने को तुम्हे… उन् ख्वाबो में जिनमे तू करती बात, मुझे मनाने की… कभी ना छोड़ के जाने की !!
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आज खुद को भुलाने को जी कर रहा है, बेवजह रूठ जाने को जी कर रहा है, तुम्हे वक़्त शायद मिले न मिले, आज खुद को मनाने को जी कर रहा है।
*** Manane ki Shayari
चला ह सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हे हक़ दे दिया किसने दियो का दिल दुखने का
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तरिके तो कई है… तुम्हे अपने पास रखने के… पर मजा तो तब है जब तुम हमें मनाने का हुनर जानो..
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जब तुम रूठ जाते हो, तो और भी हसीन लगते हो। यही सोचकर तुम्हे मनाने का मन नही करता।
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तुम तरकीब निकालते हो दिल जलाने की,, हम तरकीब निकालते है तुम्हे मनाने की.
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तुम्हे तो मनाना भी नहीं आता………… रूठू तो……कैसे रूठू……!! मनाने वाले तो…… चाँद ………… को थाली में ले आते हैं…
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रूठने का हक़ है तुझे, वजह बताया कर।
ख़फ़ा होना गलत नही, तू खता बताया कर।
Ruthne ka haq h tujhe, wajah bataya kar.
Khafa hona galat nhi, tu khata bataya kar..
*** Manane ki Shayari
बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने की चाहत पाने की चाहत है,
आप खुश रहें, मेरा क्या है,
में तो आईना हूँ मुझे टूटने की आदत है।

Manane ki Shayari
Manane ki Shayari
नया नया शौक उन्हें रूठने का लगता है
खुद ही भूल जाते हैं रूठे थे किस बात पर
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हर घड़ी का ये बिगड़ना नहीं
अच्छा ऐ जान…
रूठने का भी कोई वक़्त मुक़र्रर
हो जाए…
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मनाने रुठने के खेल में हम
बिछड़ जाएंगे … सोचा नहीं था
*** Manane ki Shayari
मुद्दतों बाद आज फिर परेशान
हुआ है दिल,
जाने किस हाल में होगा मुझसे
रूठने वाला….
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वो मेरे रूठने पर इस तरह मनाती है…
कभी तो ज़ी चाहता है बेवजह उससे रूठ जाऊं…!!!
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रूठने की उसकी अदा भी अजब है,
बिन कहे करता है शिकायतें गजब है ….
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उफ़ —उसके रूठने की अदाये भी गजब
की थी…
बात बात पे कहना की ” सोच लो फिर बात
नहीं करुँगी ”
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ज़माने से रुठने की जरूरत ही क्यों हो
जब मेरे अपने ही मेरे बने रकीब हो
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सारी उम्र करते रहे इंतज़ार तेरे रुठने का
कभी तो मौका दिया होता तूने मनाने का
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तुझे खबर भी है इसकी ओ रूठने वाले,
तुम्हारा प्यार ही मेरा कीमती खजाना था
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तू जो रूठ्ने लगा है
दिल टूटने लगा है
अब सब्र का भी दामन
मुझसे छूटने लगा है
*** Manane ki Shayari
गलती एक करी थी उसने जो हमने सची मानी थी…°
हमने जाने को कहा और उसने रुठने की ठानी थी़.
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हमें तो रूठने का सलीका भी नहीं आता
जाते-जाते खुद को उसके पास ही छोड़ आये ………
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…रूठनें का लुत्फ़ आया ही नहीं,
आप पहले ही मनाने आ गए…
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उन्हें रूठने में वक़्त नहीं लगता
मेरे पास वक़्त नहीं मानाने को …
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जंग न लग जाये मोहब्बत को कहीं…
रूठने मनाने के सिलसिले जारी रखो..।।
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रूठने-मनाने का,
सिलसिला कुछ यू हुआ।
मान गया था मगर,
फिर रूठने का दिल हुआ।।
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बहाने बनाना कोई उनसे सीखे, बनाकर मिटाना कोई उनसे सीखे,
सबब रूठने का भी होता है लेकिन, यूं ही रूठ जाना कोई उनसे सीखे !
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नाराज़गी नहीं है कोई … मै किससे
शिकायत करूँ! . . . .
ये रूठने मनाने
की रस्म तो अपनों में हुआ करती है!!
*** Manane ki Shayari
रूठने की कोई…….दास्ताँ रही होगी
यकीनन कोई …….. खता रही होगी
तुमने सलाम नहीं लिया होगा उनका
यही तो बात दिल को सता रही होगी
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बस एक यही आदत तो मेरी खरा़ब है …
रूठने के लिये ना जाने कितने बहाने चाहिये
और मान जाने के लिये …तेरा बोलना ही काफी है …
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हर बार रिश्तों में और भी मिठास आई है,
जब भी बाद रूठने के तू मेरे पास आई है।
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