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Rukhsar Shayari mix collection रुखसार गालों पर शायरी संग्रह

उनके रुखसार पर ढलकते हुए आँसू तौबा,
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा !!
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नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी वो फूल बन जाए तो कभी रुखसार बन जाए
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बड़ी इतराती फिरती थी वो अपने हुस्न-ऐ-रुखसार पर
मायूस बैठी है जबसे देखि है तस्वीर कार्ड-ऐ-आधार पर
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समेट लो भूली बिसरी यादें अपनी
सूखे पेड़ की टहनियों सी बेजान लगती हैं
चाँद के रुखसार पे खराशें पड़ती है इनसे
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देखकर तुझे वो मेरे रुखसार पर रुके है___
मुद्दतो बाद नज़ाकत से अश्क़ उतरे है
*** Rukhsar Shayari in Hindi

छेड़ती हैं कभी लब को कभी तेरे रुखसार को जालिम
तुने अपनी जुल्फो को बड़ा सिर पर चड़ा रक्खा है
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ये रुखसार पीले से लगते हैं ना
उदासी की हल्दी है हट जाएगी
तमन्ना की लाली को पकने तो दो
ये पतझड़ की छाँव छंट जाएगी”. Gulzar
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अब मैं समझा तेरे रुखसार पे तिल का मतलब,
दौलत-ए-हुस्न पे दरबान बैठा रखा है.
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सीख मुझसे आतिश- फिशां में गुल- फिशां होना
युहीं नही रुखसार पे तजल्ली ओ जलाल आता है
*** Rukhsar Shayari in Hindi
जिन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है
जुल्फ-ओ-रुखसार की जन्नत ही नहीं कुछ और भी है ।।।
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हुज़ूर आरिज़ ओ रुखसार क्या तमाम बदन
मेरी सुनो तो मुजस्सिम गुलाब हो जाये।
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नज़र उस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये
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क्यूँ पोंछते हो रुखसार से अरक को बार बार ,
शबनम के क़त्रे से गुलों में और निखार आता है !
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आँसुओं में डूबा उनका चेहरा है कुछ इस तरह
गुलों के रुखसार पे ओस ज्यूं बिखरी हुई है
*** Rukhsar Shayari in Hindi
ठहर जाती है हर नजर तेरे रुखसार पर आकर..
सनम तेरे चेहरे में कशिश कुछ ऐसी है..
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गेसू की रंगत से चलकर रुखसार की रंगत पर आई,
रफ़्ता रफ़्ता रिसते रिसते अब रात भी रुखसत पर आई ।
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“मैं तेरे रुखसार का रंग हूँ…
जितना तुम खुश रहोगे, उतना मैं सवर जाऊँगा !!”
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उनके रुखसार पर ढलकते हुए आँसू तौबा
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा
*** Rukhsar Shayari in Hindi
तेरे रुखसार पर ढलते ये शाम के किस्से..
ख़ामोशी में पढ़ा हुआ कोई कलमा हो जैसे..
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तुम्हारा रुखसार जैसे कोई किताबी कहानी है
देख कर मन मचल उठे,क्या खूब जवानी है
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आओ हुस्न-ए-यार की बातें करें
ज़ुल्फ़ की, रुखसार की बातें करें !! “चिराग हसन हसरत
*** Rukhsar Shayari in Hindi
जवानी हुस्न मैखाने लबो रुखसार बिकते हैं
हया के आईने अब तो सरेबाजार बिकते हैं
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तेरे रुखसार पे ना गिरे कोई गम का आँसू..
खुदा तेरी हर दुआ को तेरी तक़दीर बना दे..!!


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तुम आगोश-ऐ-तसव्वुर में भी आया न करो…
मेरी आहों से ये रुखसार कुम्हला न जाये कहीं…….. ~कैफ़ी आज़मी
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हमने उसके लब-ओ-रुखसार को छू कर देखा
हौसले आग को गुलज़ार बना देते हैं ~काबिल_अजमेरी
*** Rukhsar Shayari in Hindi
उसकी ज़ुलफें थीं, लब-ओ-रुखसार थे, और हाथ मेरे,
कट गये रात के लमहे.. यूं ही शरारत करते करते..!
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तुने देखी है वो पेशानी वो रुखसार वो होंठ
ज़िंदगी जिसके तसव्वुर में लुटा दी हमने ~Faiz
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पत्थर दिल ऐसे की रस्म-ए-वफ़ा की खुशबू
न उनसे न उनके लब-ओ-रुखसार से आती है ।
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ज़ुल्फ़े रुखसार पे , मदहोशी का वो आलम जान !!!
मरमरी बाँहों की वो आरज़ू , याद है मुझे वो रात !!!
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तेरा चेहरा तेरी आँखे तेरे रुखसार का जादू
मुझे महसूस करके देख मेरे प्यार का जादू
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दीदार की ख्वाहिश में हम लिखने लगे ग़ज़ल.
क्या पता रुखसार से परदा हटा दो कब.
*** Rukhsar Shayari in Hindi
तेरे हिसार-ए-रुखसार से निकलें तो सोचें…
ये शोखी खफा की है या फिर हया की है
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रुखसार पर लाली बिखरी हुई यूं हया से शायद मेरे सवाल का जवाब अच्छा है
तेरे गेसुओ से उलझने को एक उम्र बाकी है शायद मेरे उलझने का ये जाल अच्छाहै
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रुखसार पे ज़ुल्फ़ के आलम से रश्क़ करे महताब…
वाह परीज़ात हुस्न, चर्ख-आलम हुआ बजा इश्क़
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लब-ए-रुखसार की बातें, गुल-ए-गुलनार का मौसम,
हज़ारों ख्वाहिशों जैसा तुम्हारी याद का मौसम !!
*** Rukhsar Shayari in Hindi

कोई आँसू.. कोई दिल…. कुछ भी नहीं… कितनी सुनसान है ये राहगुज़र..
कोई रुखसार तो चमके, कोई बिजली तो गिरे l
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“ढूंडी है यूं ही शौक़ ने आसा’इश-ए-मंज़िल
रुखसार के ख़म में, कभी काकुल की शिकन में”
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तल्ख़ी वक़्त की देती रहे बेरुखी रुखसार पे…
वो ख़यालों में आज भी, बेलौस मुस्कुराती हैं,
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तरस गई है निगाहे उनके दिदार ए रुखसार को।
और,वौ हे की ख्वाबो मे भी नकाब मे आते है।।
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आज फिर माहताब को दिलकशी से मुस्कुराते देखा..
पड़ी जब किरणें आफताब की उनके रुखसार पर
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अल्लाह बनाता हमें मोती तेरी नथ का
बोसा कभी रुखसार का लेते कभी लब का !!
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मुद्दत से उनके रुखसार की धूप नही आई..
इसीलिये मेरे घर में नमी सी रहती है.
*** Rukhsar Shayari in Hindi
शोला ए हुस्न से न जल जाए चेहरे का नक़ाब
इसलिए रुखसार से परदे को हटा रक्खा है
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जब बिखरेगा तेरे रुखसार पर तेरी आँखों का पानी,
तुझे एहसास तब होगा कि मोहब्बत किसे कहते हैं
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सहा जाता नहीं हमसे की किसी और का ताल्लुक भी हो तुम से..
दिल चाहता है हवा से भी कह दूँ की तेरे रुखसार से हट के गुजरे..!!!
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रुसवाईयां रुखसत हो रही हैं एक एक करके मेरे रुखसार से,
देखो आज फिर से मुझे मेरे महबूब ने सीने से लगाया है
*** Rukhsar Shayari in Hindi
सेब खिलते हैं किसी के गालों पर
इस बरस बाग़ में गुलाब कहाँ ~बशीर_बद्र
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