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Saqi Shayari mix collection साक़ी पर शायरी संग्रह

नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी ~इक़बाल
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आज पी लेने दे जी लेने दे मुझ को साक़ी
कल मेरी रात ख़ुदा जाने कहाँ गुज़रेगी
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दूसरों से बहुत आसान है मिलना साक़ी,
अपनी हस्ती से मुलाक़ात बड़ी मुश्किल है!
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कहते हुए साक़ी से हया आती है वर्ना,
है यूँ कि मुझे दुर्द-ए-तह-ए-जाम बहुत है।~मिर्ज़ा ग़ालिब
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ज़हर से धो लिए हैं होंठ अपने
लुत्फ़-ए-साक़ी ने जब कमी की है #फ़ैज़
*** Saqi Shayari in Hindi

मुझ तक कब उन की बज़्म में आता था दौर-ए-जाम
साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में।~मिर्ज़ा ग़ालिब
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मै-खाने मे जब हमसे गरिबों को न पुछा,
ये कहते हुए चल दिए साक़ी का भला हो ।
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चाप सुन कर जो हटा दी थी उठा ला साक़ी,
शैख़ साहब हैं, मैं समझा था मुसलमां है कोई
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मस्त कर के मुझे औरों को लगा मुंह साक़ी
ये करम होश में रह कर नहीं देखे जाते #अली_अहमद_जलीली
*** Saqi Shayari in Hindi


मुबारिक हो ज़ईफि को ख़िरद की फ़लसफ़ा दानी
जवानी बे-नयाज़-ए-इबरत-अंजाम है साक़ी ~साहिर_लुधियानवी
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रूह किस मस्त की प्यासी गयी मयखाने से
मय उड़ी जाती है साक़ी तेरे पैमाने से
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फिर कभी होश न आये तो कोई बात नहीं,
आज हम जितनी पियें उतनी पिला दे साक़ी
*** Saqi Shayari in Hindi

पीता हूँ जितनी उतनी ही बढ़ती है तशनगी
साक़ी ने जैसे प्यास मिला दी शराब में….
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मैंने पूछा, ज़हर से भी तेज़ कोई चीज़ है..
साक़ी ने.. ज़िंदगी का प्याला थमा दिया
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असर न पूछिए साक़ी की मस्त आँखों का
ये देखिए कि कोई होश्यार बाक़ी है
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साक़ी ये हरीफ़ों को पहचान के देना क्या,
जब बज़्म से हम निकले तब दौर में जाम आया ~नुशूर_वाहिदी
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लबरेज़ कर पैमाना हमारा भी साक़ी
ग़ज़लगोई भी करेंगे अब तो नशे में हम।
*** Saqi Shayari in Hindi

आये कुछ अब्र कुछ शराब आये, उसके बाद आये तो अज़ाब आये,
बाम-इ-मिन्हा से महताब उतरे, दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये।
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साक़ी सियाह-ख़ाना-ए-हस्ती में देखना
रौशन चराग़ किस ने सर-ए-शाम कर दिया ~AHameed_Adam
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पीते थे जिसके साथ वो साक़ी बड़ा हसीन था..
आदी बना के ज़ालिम ने मैखाना बदल लिया..
*** Saqi Shayari in Hindi

अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर,
अगर है तिशनगी कामिल तो पैमाने भी आएंगे।~मजरूह

बात साक़ी की न टाली जाएगी
तौबा कर के तोड़ डाली जाएगी ~JaleelManikpuri
*** Saqi Shayari in Hindi

ये जाम ये सुबू ये तसव्वुर की चांदनी
साक़ी कहाँ मदाम जरा आँख तो मिला
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कोई समझाये कि क्या रंग है मैख़ाने का
आँख साक़ी की उठे नाम हो पैमाने का~इकबाल_सूफीपुरी
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आँखें साक़ी की जब से देखी हैं
हम से दो घूँट पी नहीं जाती – जलील मानिकपुरी
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मदहोशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे
इस वक़्त न मुझको थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है!!
गो देख चुका हूँ पहले भी नज़्ज़ारा दरिया-नोशी का,
एक और सला-ए-आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है !!
*** Saqi Shayari in Hindi

दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के
तो पछताए बहुत हम तौबा कर के ~Hafeez
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देखेंगे की आता है कहाँ से ग़म ए दुनिया,
साक़ी तुझे हम सामने बैठा के पिएगें
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अभी साक़ी का फ़ैज़-ए-आम शायद ना-मुकम्मल है
अभी कुछ इम्तियाज़-ए-बेश-ओ-कम महसूस करता हूँ
*** Saqi Shayari in Hindi

जाम भर दे गुनाहगारों के यह भी एक सबाब हे साक़ी,
आज पीने दे पीने दे कल करेंगे हिसाब ऐ साक़ी,
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तुम आज साक़ी बने हो तो शहर प्यासा है
हमारे दौर में ख़ाली कोई गिलास न था ~हसीब_सोज़
*** Saqi Shayari in Hindi

जो तुझ से कुछ भी न मिलने पे जोश हैं ऐ साक़ी
कुछ ऐसे रिंद भी हैं मय-कदे में आए हुए #असर_सहबाई
साक़ी मुझे शराब की तोहमत नहीं पसंद
मुझ को तेरी निगाह का इल्ज़ाम चाहिए.
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तेरे दर पे वो आ ही जाते हैं जिनिको पीने की आस हो साक़ी
आज इतनी पिला दे आँखों से ख़त्म रिंदों की प्यास हो साक़ी
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साक़ी मेरे ख़ुलूस की शिद्दत को देखना
फिर आ गया हूँ गर्दिश-ए-दौरां को टाल कर
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ढल गया आफ़ताब ऐ साक़ी ला पिला दे शराब ऐ साक़ी,
या सुराही लगा मेरे मुँह से या उलट दे नक़ाब ऐ साक़ी
*** Saqi Shayari in Hindi

ज़िन्दगी इक फरेब ए पैहम है मुस्कुरा कर फरेब खाता जा
रौशनी क़र्ज़ ले के साक़ी से सर्द रातों को जगमगाता जा
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हाए गर्दिश वो चश्म-ए-साक़ी की,
मैं ये समझा कि जाम चलता है !!
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तेरे दर्द का नशा मजा जो देने लगा है
लुत्फ़ वो मिलता नहीं साक़ी शराब में ~मासूम
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उठा सुराही ये शीशा वो जाम ले साक़ी
फिर उसके बाद ख़ुदा का भी नाम ले साक़ी
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साक़ी सभी को है ग़म-ए-तिश्ना-लबी
मगर मय है उसी की नाम पे जिस के उबल पड़े ~KaifiAzmi
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गिरनें के बाद भी न छूटा मेरे हाथों से,
थमाया था पैमाना साक़ी नें बड़ी हसरतों से
*** Saqi Shayari in Hindi

मेरे पैमाने में कुछ है उसके पैमाने में कुछ
देख साक़ी हो न जाए तेरे मैखाने में कुछ -नवाज़ देवबंदी
*** Saqi Shayari in Hindi

अब ना पिलाना साक़ी के दिल भर गया,
लड़खड़ा रहा था मैं,अब फिर संभल गया।
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मैं, और बज़्म-ए-मै से, योँ तशन:काम आऊँ,
गर मैंने की थी तौबा, साक़ी को क्या हुआ था। #ग़ालिब

जहाँवालों के डर से मैं यहाँ छुप छुप के पीता हूँ,
ख़ुदा का खौफ़ कैसा वो तो इसियांपोश* है साक़ी.
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बजाए मय दिया पानी का इक गिलास मुझे
समझ लिया मेरे साक़ी ने बदहवास मुझे ~सुरूर_जहानाबादी”
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए ‘मजरूह’
शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने
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मयकदे में क्या तक़ल्लुफ़ मयकशी में क्या हिज़ाब,
बज्म-ए-साक़ी में अदब-आदाब मत देखा करो #फ़राज़
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हर दफा साक़ी ने संभाला तेरे जानें के बाद
तेरे आंखों सी नशीली बादाख़ानें की फिजा़ लगती है।
*** Saqi Shayari in Hindi

ऐसा साक़ी हो तो फिर देखिए रंगे-महफ़िल,
सबको मदहोश करे, होश से जाए ख़ुद भी !! –फ़राज़
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साक़ी ऐ यार! दिल का मेरे कोई ठिकाना न रहा,
आज़ मेरे हिस्से ही क्यूँ कोई ‘पैमाना’ न रहा।~Waqeef
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जा कहे कू-ए-यार में कोई मर गया इंतिज़ार में कोई
छोड़ सौ काम आ पहुँच साक़ी जाँ-ब-लब है ख़ुमार में कोई
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साक़ी दर ए मयख़ाना अभी बंद न करना
शायद मुझे जन्नत की हवा रास न आये

*** Saqi Shayari in Hindi

अजीब सा अंधेरा है तेरे महफ़िल में ए साक़ी,
किसी ने दिल जलाया तो भी रोशनी नही हुई….
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साक़ी तेरी नज़र की क्या सियाहकारिया है
मयख़्वार होश में है जाहिद बहक रहे हैं
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ज़िक्र-ए-साक़ी ही काफ़ी नहीं है ‘फ़ना’,
बे-पिए मैकदे में गुज़ारा नहीं !!

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